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    'अमेरिका जैसी दीवार बनाना चाहते हो', अवैध प्रवासियों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से सवाल

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 06:55 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए अमेरिका जैसी दीवार बनाना चाहती है। अदालत ने अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने की प्रक्रिया पर जानकारी मांगी खासकर बांग्लादेश को। सॉलिसिटर जनरल ने बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड की याचिका पर आपत्ति जताई जिसमें बांग्ला भाषी कामगारों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया था।

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    अवैध प्रवासियों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या वह अवैध प्रवासियों का देश में प्रवेश रोकने के लिए सीमा पर अमेरिका जैसी दीवार बनाना चाहता है।

    जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र से अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने में (खासकर बांग्लादेश को) सरकारों द्वारा अपनाई गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के बारे में जानकारी देने को कहा। शीर्ष अदालत ने इस मामले में गुजरात सरकार को भी पक्षकार बनाया।

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    सॉलिसिटर जनरल ने जताई इस बात पर आपत्ति

    केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति जताई। इसमें बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में बांग्ला भाषी प्रवासी कामगारों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया था। मेहता ने कहा कि कोई भी पीडि़त पक्ष अदालत में मौजूद नहीं है। हमें पता है कि कुछ राज्य सरकारें कैसे अवैध प्रवासियों पर फलती-फूलती हैं। जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा बन गया है।

    पीठ ने क्या कहा?

    इस पर पीठ ने कहा कि पीडि़त शायद संसाधनों के अभाव में शीर्ष अदालत तक पहुंचने में असमर्थ हैं। मेहता ने याचिकाकर्ता बोर्ड के वकील प्रशांत भूषण का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को अमेरिका में लोगों की मदद करने के अलावा लोगों को अदालत तक पहुंचने में मदद करनी चाहिए।

    जस्टिस बागची के सीमा पर दीवार बनाने संबंधी सवाल पर मेहता ने इससे इन्कार किया। कहा, सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि अवैध प्रवासी हमारे संसाधनों को नष्ट न करें। ऐसे एजेंट हैं जो देश में अवैध प्रवेश करवाते हैं।

    तब जस्टिस बागची ने कहा, ''यह राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्र की अखंडता और जैसा आपने कहा हमारे संसाधनों के संरक्षण का सवाल है। साथ ही याद रखना होगा कि हमारी साझी विरासत है और (पश्चिम) बंगाल व पंजाब में भाषा एक है और सीमाएं देश को विभाजित करती हैं। केंद्र इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।''

    प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

    भूषण ने आरोप लगाया कि बांग्ला भाषी लोगों को उठाकर जबरन बांग्लादेश में धकेला जा रहा है। उन्होंने एक गर्भवती महिला के मामले का हवाला दिया, जिसके लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है।

    जस्टिस बागची ने तब अवैध रूप से देश में प्रवेश की कोशिश करने वालों व भारतीय भूभाग पर रहने वालों के बीच अंतर को रेखांकित किया और कहा कि देश में रहने वालों के लिए कुछ प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि भाषा निर्वासन का आधार नहीं है।

    मेहता ने याचिका पर जवाब दाखिल करने की पेशकश की और इस मामले की सुनवाई लंबित रो¨हग्या मामले के साथ करने का आग्रह किया। जस्टिस सूर्यकांत ने मेहता से दोनों मामलों में जवाब दाखिल करने को कहा। मेहता ने तब बताया कि अधिकांश यूरोपीय देश अवैध प्रवासियों की समस्या का सामना कर रहे हैं और इसे वास्तव में चिंताजनक बताया।

    (न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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