SC: 'दूसरों के खिलाफ जांच लंबित होने के आधार पर नहीं मांग सकते जमानत', DHFL के पूर्व प्रमोटरों की जमानत रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी आरोपित इस आधार पर स्वत जमानत नहीं मांग सकता है कि अन्य आरोपितों के खिलाफ जांच लंबित है या जांच एजेंसी द्वारा दायर आरोपपत्र अधूरा है। इस टिप्पणी के साथ ही शीर्ष अदालत ने करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाला मामले में डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटरों कपिल वधावन और उनके भाई धीरज को दी गई जमानत रद कर दी।

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी आरोपित इस आधार पर स्वत: जमानत नहीं मांग सकता है कि अन्य आरोपितों के खिलाफ जांच लंबित है या जांच एजेंसी द्वारा दायर आरोपपत्र अधूरा है। इस टिप्पणी के साथ ही शीर्ष अदालत ने करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाला मामले में डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटरों कपिल वधावन और उनके भाई धीरज को दी गई जमानत रद्द कर दी।
डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटरों दी गई जमानत रद्द
शीर्ष अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 167 की उपधारा (2) में संलग्न प्रविधान का लाभ अपराधी को तभी मिलेगा, जब उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया हो और जांच लंबित रखी गई हो। हालांकि, एक बार आरोपपत्र दाखिल हो जाने के बाद यह अधिकार समाप्त हो जाता है।
जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और पंकज मित्तल की पीठ ने कहा कि आरोपपत्र के साथ पेश की गई सामग्री से एक बार अदालत किसी अपराध के घटित होने के बारे में संतुष्ट हो जाती है और आरोपित द्वारा कथित तौर पर किए गए अपराध का संज्ञान लेती है, तो यह मायने नहीं रखता कि आगे की जांच की जाएगी या नहीं।
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने कहा कि अन्य अभियुक्तों के लिए आगे की जांच लंबित होने या आरोपपत्र दाखिल करने के समय कुछ दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से न तो आरोपपत्र खराब होगा और न ही इस आधार पर अभियुक्त को स्वत: जमानत का दावा करने की अनुमति होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि विशेष अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने कानूनी स्थिति की अनदेखी करके और वधावन बंधुओं को जमानत देकर गंभीर गलती की है।
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