नागपुर, प्रेट्र। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को नागपुर विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। बीए द्वितीय वर्ष (इतिहास) के पाठ्यक्रम के तीसरे खंड में इसके बारे में बताया गया है। जबकि पहला भाग कांग्रेस की स्थापना और पंडित जवाहरलाल नेहरू के उदय से संबंधित है। दूसरा भाग सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे मुद्दों पर आधारित है।

नागपुर विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज के सदस्य सतीश शैफले ने बताया कि 2003-04 में भी 'आरएसएस एक परिचय' नाम से हमने एक अध्याय एमए-इतिहास में शामिल किया था। उन्होंने इस कदम सही ठहराते हुए कहा कि इतिहास का पुनर्लेखन समाज के सामने नए तथ्य लाता है।

विवि के इस कदम पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रवक्ता सचिन सावंत ने ट्वीट में कहा कि आखिर नागपुर विश्वविद्यालय को आरएसएस और राष्ट्र निर्माण का संदर्भ कहां मिल गया। यह वह संगठन है जिसने अंग्रेजों के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन का विरोध किया, 52 साल तक तिरंगे को अशुभ करार देते हुए नहीं फहराया, संविधान के बदले मनुस्मृति से शासन चलाना चाहा।

वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि छात्रों को आरएसएस की राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय संविधान के बारे में उसकी सोच के बारे में भी बताया जाना चाहिए।

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