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    Vietnam Facts: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के दौरे से फिर चर्चा में वियतनाम, जानें इससे जुड़ी 10 जरूरी बातें

    By Shalini KumariEdited By: Shalini Kumari
    Updated: Sun, 10 Sep 2023 06:28 PM (IST)

    नई दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) में शामिल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (American President Joe Biden) वियतनाम के लिए रवाना हो गए हैं। जिसके बाद से वियतनाम काफी चर्चा में है। गौरतलब है कि वियतनाम (Vietnam) यात्रा और पर्यटन के लिए काफी बेहतरीन देश है। भारत की तुलना में इस देश को काफी सस्ता माना जाता है।

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    वियतनाम देश से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

    नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) के पहले और दूसरे सत्र में शामिल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन वियतनाम रवाना हो गए हैं। जी20 शिखर सम्मेलन के समापन से पहले ही बाइडन वियतनाम के निकल गए, जिसके बाद से वह देश चर्चा में है।

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    भारत की अध्यक्षता में 9 और 10 सितंबर को जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस समिट में शामिल होने के लिए कई विश्व नेता नई दिल्ली पहुंचे। पहले दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी नेताओं का भारत मंडपम में स्वागत किया और इसके बाद बैठक का आयोजन हुआ।

    राष्ट्रपिता को अर्पित की श्रद्धांजलि

    दूसरे दिन यानी 10 दिसंबर की सुबह पहले सभी विश्व नेता राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे और इसके बाद वापस भारत मंडपम पहुंचे। यहां पर पौधारोपण होने के बाद सभी नेता तीसरे सत्र (वन फ्यूचर) पर चर्चा करने वाले थे, इसके पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति वियतनाम दौरे पर निकल गए।

    राष्ट्रपति जो बाइडन वियतनाम से ही अमेरिका वापसी करेंगे। बाइडन के भारत दौरे पर उनकी सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। इसी बीत, लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि आखिर बाइडन किस कारण से वियतनाम का दौरा कर रहे हैं।

    बता दें कि अमेरिका लगातार वियतनाम से अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का यह दौरा उसी कड़ी में आयोजित किया गया है। इस खबर में हम आपको वियतनाम से जुड़ी कुछ बातें बताएंगे।

     

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान वियतनाम जापान (Japan) के नियंत्रण में आ गया। शासक हो ची मिन्ह ने 1945 में हनोई पर अधिकार कर के वियतनाम को स्वतंत्र घोषित कर दिया था।

    वियतनाम जाने के लिए भारतीयों को पर्यटक वीजा (Travel Visa) लेना होता है। एक सिंगल-एंट्री वीजा केवल 30 दिनों के लिए वैध माना जाता है।

    वियतनाम से भारत कई चीजें आयात की जाती हैं। आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण, प्लास्टिक, तांबे, कॉफी, चाय और मसाले, लोहा आदी समेत कई चीजें आयात की जाती हैं। भारत पिछले कई वर्षों से कच्चे काजू का बड़े पैमाने पर आयात करता रहा है।

    अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध वियतनाम में भारत का एक रुपया, 289.4452 वियतनामी डोंग के बराबर है। भारतीय 100 रुपये, वियतनाम के 28,944.52 डोंग के बराबर होता है।

    देश के अलग-अलग हिस्से से वियतनाम जाने में अलग-अलग समय लगता है। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचने में करीब साढ़े 6 घंटे का समय लगता है। इसके जरिए अंदाजा लगाया जा सकता है कि वियतनाम पहुंचने में किसी भी भारतीय शहर से कितना समय लगेगा।

    लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, वियतनाम में लोग बौद्ध और देशी धर्म को मानते हैं। हालांकि, वियतनाम में छह प्रमुख धर्म हैं, जिसमें बौद्ध धर्म, कैथोलिक धर्म, प्रोटेस्टेंटवाद, मुस्लिम, काओडावाद और होआ हाओ बौद्ध धर्म के लोग शामिल हैं।  

    पुराने समय में वियतनाम के कई नाम थे।  वियतनाम को हांग बैंग राजवंश के दौरान वान लैंग कहा जाता था। थाक राजवंश के तहत आउ लेक, त्रियु राजवंश के दौरान नाम वियत, प्रारंभिक ली राजवंश के दौरान वान जुआन, सिन्ह राजवंश और प्रारंभिक ली राजवंश के दौरान Đại Cệ Việt कहा जाता था। साथ ही, पौराणिक साहित्यों में वियतनाम को चम्पा नाम से जाना जाता था।

    वियतनाम का दूसरा नाम अन्नम है, जिसकी उत्पत्ति सातवीं शताब्दी में एक चीनी नाम के रूप में हुई थी। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में राष्ट्रवादी लेखक फान बाई चाउ ने 'वियतनाम' नाम को पुनर्जीवित किया।

    विश्व बैंक ने वियतनाम को निम्न मध्यम आय वाले देश के रूप में परिभाषित किया है। कुल आबादी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अब भी गरीबी में जीवन बिता रहा है।

    वियतनाम में कोयला, फॉस्फेट, सोना, लोहा, मैंगनीज, चांदी, जस्ता, क्रोमेट, तांबा और गैस भंडार, लकड़ी, जलविद्युत मुख्य प्राकृतिक संसाधन हैं।