Move to Jagran APP

Shaheed Diwas 2023 : 23 मार्च को क्‍यों मनाया जाता है शहीद दिवस? और क्या है इसका महत्व

Shaheed Diwas 2023 देश की आजादी के लिए कई वीर सपूतों भगत सिंह शिवराम राजगुरु सुखदेव ने अपने प्राणों की कुर्बानी दी थी। इन तीनों महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है।

By Ashisha Singh RajputEdited By: Ashisha Singh RajputPublished: Tue, 21 Mar 2023 07:07 PM (IST)Updated: Thu, 23 Mar 2023 08:37 AM (IST)
देश की आजादी के लिए कई वीर सपूतों भगत सिंह, शिवराम राजगुरु, सुखदेव ने अपने प्राणों की कुर्बानी दी थी।

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। भारत में शहीदों के सम्मान और देश के लिए दिए गए उनके बलिदान को याद करने के लिए हर साल शहीद दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर भारत के गौरव, शान और आजादी के लिए लड़ने वाले भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु, सुखदेव को श्रद्धांजलि दी जाती है। शहीद दिवस देश के लिए बहुत खास और भावुक दिन होता है। 23 मार्च को भारत के सपूतों शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए हंसते-हंसते फांसी की सजा को गले लगा लिया था। उनकी शहादत को देश का हर नागरिक सच्चे दिल से सलाम करता है।

क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस ?

23 मार्च को तीन स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया था। कम उम्र में इन वीरों ने देश के आजादी की लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसी के साथ भारतीयों के लिए भगत सिंह, शिवराम राजगुरु, सुखदेव प्रेरणा के स्रोत बने हैं। उनकी क्रांति और जोश आज युवाओं की रगों में बहता है। यही कारण है कि इन तीनों महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है।

वीरों के लिए की जाती है प्रार्थना

शहीद दिवस के मौके पर भगत सिंह, सुखदेव और शिवराम राजगुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। विभिन्न शिक्षण संस्थाएं और सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों द्वारा इस मौके पर मौन सभा का आयोजन किया जाता है और वीरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। कई जगहों पर तो 23 मार्च शहीद दिवस पर निबंध लेखन तथा सार्वजनिक भाषण का भी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के बाद सुनाई गई सजा

देश की आजादी के लिए कई वीर सपूतों भगत सिंह, शिवराम राजगुरु, सुखदेव ने अपने प्राणों की कुर्बानी दी थी। अंग्रेजी हुकूमत की खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए उन्होंने च्पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिलज् के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी की सजा सुना दी गई। 23 मार्च यह वही दिन है, जब अंग्रेजी सरकार ने देश के तीन वीर सपूतों को फांसी दी थी।

वीर सपूतों के बारे में

भगत सिंह : - मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले भगत सिंह का जन्म पंजाब के लायलपुर में 28 सितम्बर 1907 को हुआ था। चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर भगत सिंह ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का साहस से मुकाबला किया। वह मार्क्स के विचारों से काफी प्रभावित थे। भगत सिंह का 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा काफी प्रसिद्ध है। यह नारा देशवासियों में जोश भरने का काम किया था। इसका मतलब है कि क्रांति की जय हो।

शहीद सुखदेव :- सुखदेव का जन्म 15 मई, 1907 को पंजाब को लायलपुर पाकिस्तान में हुआ। भगतसिंह और सुखदेव के परिवार लायलपुर में पास-पास ही रहने से दोनों वीरों में गहरी दोस्ती थी। यही नहीं दोनों लाहौर नेशनल कॉलेज के छात्र भी थे। सांडर्स हत्याकांड में सुखदेव ने भगत सिंह तथा राजगुरु का साथ दिया था।

शहीद राजगुरु :- शहीद राजगुरु का 24 अगस्त, 1908 को पुणे जिले के खेड़ा में राजगुरु का जन्म हुआ। राजगुरु शिवाजी की छापामार शैली के प्रशंसक होने के साथ-साथ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से भी प्रभावित थे।

30 जनवरी को मनाए जाने वाले शहीद दिवस से कैसे है अलग

आपको बता दें शहीदों के सम्मान में भारत में हर साल कुल सात शहीद दिवस मनाए जाते हैं। यह अलग-अलग तारीख और महीने में पड़ते हैं। यह सात दिन 30 जनवरी, 23 मार्च, 19 मई, 21 अक्टूबर, 17 नवंबर, 19 नवंबर और 24 नवंबर है। बात यदि 30 जनवरी और 23 मार्च को मनाए जाने वाले शहीद दिवस की करें तो इन दोनों में अंतर है। जी हां 30 जनवरी 1948 को भारत को आजादी मिलने के ठीक पांच महीने बाद नई दिल्ली में बिड़ला हाउस परिसर में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी के सीने और पेट में तीन गोलियां मारी थी। वहीं 23 मार्च 1931 को शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को याद किया जाता है, जब अंग्रेजों ने फांसी की सजा दे दी थी।


This website uses cookies or similar technologies to enhance your browsing experience and provide personalized recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.