ऩई दिल्ली, एजेंसी। Serial Blasts in Sri lanka, श्रीलंका रविवार को ईसाइयों के पर्व ईस्टर के मौके पर एक के बाद एक आठ धमाकों व आत्मघाती हमलों से दहल उठा। इस आतंकी हमले में विभिन्न चर्च और पांच सितारा होटलों को निशाना बनाया गया। इसमें कम से कम 215 लोगों की मौत हो गई है और अन्य 500 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में 27 विदेशी हैं, जिसमें तीन भारतीय भी शामिल हैं। 

तीन भारतीय की मौत

सुषमा स्वराज ने बताया कि इस हमले में उन्हें तीन भारतीयों की मौत की जानकारी मिली है। इनके नाम लक्ष्मी, नारायण चंद्रशेखर और रमेश हैं। उन्होंने कहा कि कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने हमें अवगत कराया है कि वहां के राष्ट्रीय अस्पताल द्वारा उन्हें तीन भारतीय नागरिकों की मृत्यु के बारे में सूचित किया गया है। हम इस मामले में और जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। 

सहायता के लिए भारत तैयार
उन्होंने यह भी कहा 'मैंने श्रीलंका के विदेश मंत्री से बात की है। उनसे मैंने कहा है कि भारत सभी मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। जरूरत पड़ने पर हम अपनी मेडिकल टीम को भेजने के लिए भी तैयार हैं।

इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेन और पीएम रानिल विक्रमसिंघे को फोन कर घटना पर दुख जताया और हालात का जायजा लिया। उन्होंने विस्फोट में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द ठीक होने की कामना भी की। मोदी ने पहले एक ट्वीट के जरिए और बाद में राजस्थान में एक चुनावी रैली में इन विस्फोटों को बर्बर कृत्य करार देते हुए श्रीलंका को हर तरह की मदद देने का भी आश्वासन दिलाया।

श्रीलंका की घटना के बाद गोवा समेत देशभर में चर्चो की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत तमाम नेताओं ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। सभी ने कहा है कि इस तरह की आतंकी घटनाओं का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है।

भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क

स्वराज ने ट्वीट कर यह भी बताया कि वह कोलंबो स्थित भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क में हैं। भारतीय उच्चायोग ने घटना में प्रभावित लोगों के बारे में जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया है। स्वराज की अगुवाई में पूरे हालात की निगरानी भी की जा रही है। विदेश मंत्रालय की तरफ से अलग से विज्ञप्ति जारी कर पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया गया है। भारत ने अपनी पुरानी नीति को दोहराया है कि किसी भी तरह की आतंकवादी घटनाओं को जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

Posted By: Tanisk