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    आसाराम ने की सजा को निलंबित करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को जारी किया नोटिस

    Updated: Fri, 22 Nov 2024 03:29 PM (IST)

    2013 में गांधीनगर के पास स्थित आसाराम के आश्रम में रहने वाली एक महिला ने उनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। करीब 10 साल बाद 2023 में गांधीनगर की एक निचली अदालत ने इस मामले में आसाराम को दोषी पाया। अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अब इसी सजा को निलंबित करने की मांग आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट से की है।

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    आसाराम की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस। (फाइल फोटो)

    पीटीआई, नई दिल्ली। आसाराम बापू ने आजीवन कारावस की सजा को निलंबित करने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की। उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार चिकित्सा आधार पर ही की जाएगी।

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    2013 के दुष्कर्म मामले में गांधीनगर की निचली अदालत से आसाराम बापू को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। याचिका पर अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी। पीठ ने कहा, ‘‘हम नोटिस जारी करेंगे। मगर हम केवल चिकित्सा शर्तों पर ही विचार करेंगे।’’

    हाईकोर्ट से याचिका हो चुकी खारिज

    सुप्रीम कोर्ट से पहले आसाराम बापू ने गुजरात हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी। मगर सजा को निलंबित करने की मांग वाली याचिका को 29 अगस्त को ही हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सजा को निलंबित करने और जमानत देने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि राहत का कोई मामला नहीं बनता है।

    पिछले साल 2023 में गांधीनगर के सत्र न्यायालय ने दुष्कर्म के मामले में आसाराम बापू को सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2013 में गांधीनगर के नजदीक स्थित आसाराम के आश्रम में रहने वाली एक महिला ने दर्ज कराया था।

    जोधपुर जेल में आसाराम

    मौजूदा समय में आसाराम राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद है। जोधपुर में दुष्कर्म एक अन्य मामले में सजा के खिलाफ आसाराम की अपील को राजस्थान उच्च न्यायालय ने इसी साल जनवरी में खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि उनकी अपील के निपटारे में संभावित देरी, उनकी उम्र और चिकित्सा स्थिति के बारे में उनकी दलीलें राहत देने के लिए प्रासंगिक नहीं हैं।

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