पूजा स्थल कानून में धार्मिक स्थान से जुड़े मुकदमे पर रोक को SC में चुनौती, याचिका में क्या कहा गया?
Supreme court पूजा स्थल कानून में धार्मिक स्थल की प्रकृति के मुकदमे पर रोक को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका में पूजा स्थल कानून की धारा 4 (2) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। इस कानून के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में आधा दर्जन से ज्यादा याचिकाएं और हस्तक्षेप अर्जियां लंबित हैं।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पूजा स्थल कानून 1991 के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल हुई है जिसमें पूजा स्थल कानून की धारा 4(2) को चुनौती दी गई है। यह धारा अदालतों के धार्मिक स्थल की प्रकृति बदलने से संबंधित मुकदमों की सुनवाई पर रोक लगाती है।
याचिका में क्या रखी मांग?
याचिका में मांग है कि धारा 4(2) को इसी कानून की प्रस्तावना का उल्लंघन करने वाली और संविधान के अनुच्छेद 14, 21 ,25 और 26 (समानता और धार्मिक स्वतंत्रता) के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने वाली घोषित किया जाए।
याचिका में क्या कहा गया?
- यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट घोषित करे कि सक्षम अदालत को धार्मिक स्थल का मूल चरित्र तय करने के संबंध में उचित आदेश पारित करने का अधिकार है।
- सुप्रीम कोर्ट में यह नयी याचिका कानून के छात्र नितिन उपाध्याय ने दाखिल की है।
- कहा है कि कोर्ट घोषित करे कि पूजा स्थल कानून पूजा स्थल के मूल चरित्र को बदलने की मनाही करता है, उसकी इमारत के ढांचे को बदलने की नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिकाओं पर जताया था ऐतराज
कानून पूजा स्थल के ढांचे को नहीं बल्कि धार्मिक स्वरूप को संरक्षित करता है। कहा गया है कि मूल चरित्र इमारत का सर्वे किये बगैर तय नहीं हो सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर ही लगातार दाखिल हो रही नयी याचिकाओं पर ऐतराज जताया था और कहा था कि अब बहुत हो गया, कोर्ट इस मामले में कोई नयी याचिका पर विचार नहीं करेगा।
अप्रैल के पहले सप्ताह में होगी SC में सुनवाई
- अगर किसी के पास कोई नये आधार हैं तो वह हस्तक्षेप अर्जी दाखिल कर सकता है। कोर्ट इस मामले में अप्रैल के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगा।
- इस कानून के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में आधा दर्जन से ज्यादा याचिकाएं और हस्तक्षेप अर्जियां लंबित हैं। इनमें कुछ में कानून को चुनौती दी गई है और कुछ कानून के समर्थन में हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अदालतों के धार्मिक स्थलों पर दावे के मामलों में सर्वे या प्रभावी आदेश जारी करने पर रोक लगा रखी है।
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