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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 24, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सेव द टाइगर अभियान को सामूहिक प्रयासों और बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता से बढ़ावा दिया जा सकता है

By Ashisha SinghEdited By:
Published: Sat, 24 Jul 2021 03:58 PM (IST)

बाघ गणना ने वर्तमान बाघों की आबादी 2967 की पुष्टि की है। 2014 में यह आंकड़े 2226 थे। पिछले साल ...और पढ़ें

सेव द टाइगर अभियान को सामूहिक प्रयासों और बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता से बढ़ावा दिया जा सकता है
सेव द टाइगर अभियान को सामूहिक प्रयासों और बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता से बढ़ावा दिया जा सकता है

नई दिल्ली, आइएएनएस। भारत में बाघों की आबादी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नवीनतम बाघ गणना ने वर्तमान बाघों की आबादी 2967 की पुष्टि की है। 2014 में यह आंकड़े 2226 थे। पिछले साल जारी किए गए भारतीय बाघ सर्वेक्षण से पता चला है कि भारत में अब बाघों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत है। यकीनन यह आंकड़ा 'सेव द टाइगर' अभियान को और भी सकारात्मक बनाता है।

बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है

भारत में तेजी से विलुप्त हो रही प्रजातियों और जीवों को संरक्षित करने के लिए अक्सर तरह-तरह के संरक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। एक महत्वपूर्ण अभियान के तहत बाघों के संरक्षण के लिए 'सेव द टाइगर' अभियान 2010 में शुरू हुआ था और इसका संरक्षण स्वतः ही बड़ी संख्या में वनस्पतियों और जीवों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण को सुनिश्चित करता है। वरुण खुल्लर जो एक कॉर्पोरेट पेशेवर और वन्यजीव फोटोग्राफर हैं, उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसा कि हम 29 जुलाई को 'अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस' ​​मनाते हैं, बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है, वरुण खुल्लर का मानना ​​है कि इस विशाल कार्य को सामूहिक प्रयासों से ही प्राप्त किया जा सकता है और "सेव द टाइगर" अभियान को प्रेरित करना चाहिए और जागरूकता फैलाना चाहिए। आइएएनएस से बातचीत में वरुण खुल्लर लोगों को प्रजातियों के जीवन संरक्षण के प्रति जागरूक रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें उनके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए अपनी शक्ति के भीतर जो कुछ भी कर सकते हैं हमें करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी बाघों व अन्य प्रजातियों की सुंदरता और उपस्थिति का आनंद ले सकें।

कैसे दें 'सेव द टाइगर' अभियान में योगदान

'सेव द टाइगर' अभियान में योगदान किस प्रकार दिया जा सकता है इस बात पर वरुण खुल्लर ने कहा कि जब हम बाघों की रक्षा करते हैं, तो हम अपनी रक्षा करते हैं। पिछले चार वर्षों से, मैं अपने वन्यजीव टाइगर कैलेंडर को प्रिंट कर रहा हूं और अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को वितरित कर रहा हूं ताकि हमारे आसपास की खूबसूरत प्रकृति और बाघों के बारे में जागरूकता पैदा हो सके। इसके माध्यम से, मैं जनता के बीच वन्यजीव पर्यटन को बढ़ाने की कोशिश करता हूं जो वन विभागों के लिए धन उत्पन्न करता है और फिर धन का उचित उपयोग बाघ को बचाने और जंगलों को शिकारियों से बचाने के लिए किया जाता है। इस पैसे का उपयोग कैमरा ट्रैप लगाने, सीमाओं को सुरक्षित करने, जंगल के मुख्य क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति और बिजली पैदा करने, जंगलों में गहरे सुरक्षा चौकियों की स्थापना के लिए "सेव द टाइगर" अभियान में मदद करने के लिए किया जाता है। इन सभी आवश्यक चीजों में लोग शारीरिक और वित्तीय रूप से योगदान देकर 'सेव द टाइगर' अभियान को बढ़ावा दे सकते हैं