रायपुर [दीपक शुक्ला]। छत्तीसगढ़ स्थित छोटे से गांव पुरई के 12 नन्हे तैराकों को भविष्य के ओलंपियन के रूप में चुन लिया गया है। ओलंपिक को लक्ष्य कर इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। 10 से 13 साल के इन बच्चों को भारतीय खेल प्राधिकरण (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, साई) गांधीनगर, गुजरात स्थित अपनी स्वीमिंग अकादमी में रखकर तराशेगा। पुरई शनिवार को तब खुशी से झूम उठा, जब वहां भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की टीम पहुंची। गांव के चयनित 12 बाल तैराकों के परिवार वालों ने अपने नौनिहालों को साई गांधीनगर (गुजरात) स्थित स्वीमिंग अकादमी भेजने के लिए सहमति दे दी है। इनमें से 10 तैराक एक ही खानदान से जुड़े हैं। साई सेंटर रायपुर की डायरेक्टर गीता पंथ के नेतृत्व में एक टीम शनिवार को पुरई पहुंची। अधिकारियों ने प्रत्येक तैराक के घर जाकर उसके परिवारीजन से मुलाकात की, उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया गांधीनगर गुजरात स्थित राष्ट्रीय स्वीमिंग अकादमी के बारे में बताया। यह भरोसा दिलाया कि उनके बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित होंगे, जवाबदारी साई की है। इसके बाद का क्षण भावुक कर देने वाला था।

कभी नहीं की थी कल्‍पना
बारह बाल तैराकों के घर वालों ने सपने में भी यह कल्पना नहीं की थी कि छोटे से गांव के एक तालाब में तैरने वाले उनके बच्चे अब अंतरराष्ट्रीय तैराकों को पछाड़ने के काबिल बनने के लिए दूर गुजरात जाने वाले हैं। न इन तैराकों, न इनके माता—पिता ने कभी यह सोचा था कि यह दिन भी उनके जीवन में आएगा। इस गांव में शनिवार का दिन किसी दीपावली—होली से कम नहीं था। पूरा गांव दैनिक जागरण व उसके सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया का शुक्रिया अदा कर रहा था, जिसके प्रयासों से इन तैराकों के हुनर को भारत सरकार ने जाना और माना भी। गौरतलब है कि आठ बालक और चार बालिका तैराकों को गांधीनगर में भविष्य के ओलंपियन के रूप में तैयारी करवाई जाएगी। सभी अभिभावकों के सहमति पत्र रविवार को बाई हैंड साई रिजनल सेंटर भोपाल भेजे जाएंगे, वहां से भारतीय खेल प्राधिकरण दिल्ली। प्रशिक्षण की तय तारीख के बारे में दिल्ली से सूचना दी जाएगी।

कुछ को नहीं पता था 
साई की टीम जब तैराकों के घर पहुंची और लोगों को बताया कि आपके बेटे/बेटी का चयन साई गांधीनगर, गुजरात स्थित राष्ट्रीय स्वीमिंग अकादमी के लिए हुआ है तो कुछ लोग अचरज में पड़ गए। कई लोगों को यह सूचना साई टीम से ही मिली, लिहाजा अचानक से लोग कुछ बोल नहीं पा रहे थे, कुछ की आंखें भर आईं। बाद में साई के अफसरों ने उन्हें विस्तार से समझाया।

कोच की सराहनीय भूमिका 
बच्चों की प्रतिभा को निखारने का श्रेय कोच ओम ओझा को जाता है, जिन्होंने एक छोटे से तालाब में तैराकी के गुर सिखाकर उन्हें इस काबिल बनाया। ये कोच इन बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर हर मोर्चे पर खड़े रहे। इन्होंने 35 बच्चों को तैयार करने में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। खिलाड़ियों ने कहा कि उनके हीरो उनके कोच सर हैं।

घर वालों ने पूछा-कैसे होगी पढ़ाई
साई के अधिकारियों से परिजनों ने पूछा कि आप हमारे बच्चों को गुजरात ले जाएंगे तो इस बीच उनकी पढ़ाई कैसे होगी। फिक्र है कि उनके बच्चे कहां रहेंगे, खाना कहां खाएंगे, पढ़ाई कैसे करेंगे। इसपर साई डायरेक्टर ने कहा कि पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार उठाएगी। जब भी चाहें, परिवार के सदस्य बच्चों से जाकर मिल सकते हैं।

आठ लड़के और चार लड़कियां शामिल 
शुक्रवार को सरकार ने इन 12 बच्चों के नाम की घोषणा की। इनमें आठ लड़के और चार लड़कियां हैं। पुरई गांव के मछुआरों के अनेक बच्चे गांव के ही तालाब में तैरना सीख राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्र्दशन कर रहे थे। पिछले साल अक्टूबर में जब गांव के दो गंदे नाले इस तालाब से जोड़ दिए गए, तो इसके विरोध में बच्चे जल सत्याग्रह पर आमादा हो गए।

दैनिक जागरण सामने लाया 
दैनिक जागरण और इसके सहयोगी प्रकाशन मप्र व छत्तीसगढ़ के अग्रणी समाचारपत्र नईदुनिया ने गरीब परिवारों के इन ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा और खेल के प्रतिइन के जज्बे की कहानी को देश के सामने रखा। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस पर संज्ञान लिया और खेल मंत्रालय के निर्देश पर साई की टीम पुरई गांव जा पहुंची। गांव के ही तालाब में बच्चों का ट्रायल कर प्रतिभा का आकलन किया गया। 35 बच्चे ट्रायल में खरे उतरे, जिन्हें रायपुर स्थित स्वीमिंग पूल में एक माह का प्रशिक्षण देकर पुन: ट्रायल लिया गया।

खुली नई राह 
इस पूरी कवायद ने जहां भविष्य के इन 12 ओलंपियन को सामने ला खड़ा किया, वहीं गांव की खेल प्रतिभाओं के लिए नई राह खोल दी। इस मायने में यह पूरी कवायद भारतीय खेल इतिहास में एक नया प्रयोग और मील का पत्थर साबित हुई।

 

Posted By: Kamal Verma