Data Story: पटाखों का धुआं आपकी सांसों पर पड़ रहा भारी, इस रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Crackers Causing Pollution दिवाली को कुछ ही दिन बचे हैं। प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए इस बार दिल्ली सरकार ने पटाखों पर बैन लगाने का ऐलान काफी पहले ही कर दिया। आइए जानते हैं कि पटाखों से दिल्ली की हवा पर क्या असर पड़ता है।

नई दिल्ली, अनुराग मिश्र/विवेक तिवारी। दिवाली को कुछ ही दिन बचे हैं। प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए इस बार दिल्ली सरकार ने पटाखों पर बैन लगाने का ऐलान काफी पहले ही कर दिया। हालांकि दिल्ली की गली मोहल्लो में अभी से बच्चों को छोटे मोटे पटाखे जलाते देखा जा सकता है। कई बार आपके मन में ये सवाल उठता होगा कि पटाखों से दिल्ली की हवा पर क्या असर पड़ता है। तो आइये आपके सारे सवालों का जवाब हम आपको देते हैं।
बच्चों को दिवाली पर बच्चों को मिर्ची बम जलाने में बहुत मजा आता है। कुछ लोग तो बड़ी लड़ियां भी जलाते हैं। पुणे के चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन और पुणे विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य विज्ञान के इंटरडिसिप्लेनरी स्कूल के छात्रों की ओर से की गई एक रिसर्च के मुताबिक1000 मिर्ची बम की चटाई जलाने पर पीएम 2.5 का स्तर 47789 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। इसी तरह एक महताब जलाने से हवा में पीएम 2.5 का स्तर 34068 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। बच्चों को सांप जलाने में बहुत मजा आता है। लेकिन सांप बनाने वाली एक टिकिया जलाने से हवा में पीएम 2.5 का स्तर 64849 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। एक फुलझड़ी जलाने पर हवा में 10898 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पीएम 2.5 का स्तर पहुंच जाता है। वहीं एक अनार जलाने पर हवा में पीएम 2.5 का स्तर 5640 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है।
जानिए पटाखे में मौजूद कैमिकल कैसे करते हैं आपकी सेहत को प्रभावित
कॉपर: ये आपके श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है
कैडमियम: ये आपके खून में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम करके एनीमिया की ओर ले जाता है।
जिंक: इसके हवा में अधिक होने से धुआं अधिक होता है। आपका दम घुटने लगता है और उलटी आती है।
सीसा: तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है।
मैग्नीशियम: हवा में मैग्नीशियम होने से आपको बुखार आ सकता है।
सोडियम: यह अत्यधिक क्रियाशील तत्व है। ये जलन पैदा कर सकता है।
क्यों है पीएम 2.5 खतरनाक
इंसान के बालों का मोटाई लगभग 50 से 70 माइक्रॉन होती है
समुद्र किनारे मिलने वाली रेत की मोटाई करीब 90 माइक्रॉन
प्रदूषण में मौजूद पीएम 2.5 के कणों की मोटाई 2.5 माइक्रॉन होती है, इनमें धुएं से निकलने वाले पार्टिकल, ऑर्गेनिक कंपाउंडऔर धातुओं के टुकड़े होते हैं।
पीएम 10 कणों की मोटाई करीब 10 माइक्रॉन होती है। इसमें प्रमुख रूप से धूल और कुछ प्रदूषक तत्व होते हैं।
पर्टिकुलेट मैटर
पर्टिकुलेट मैटर या कण प्रदूषण वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है। हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते हैं। कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है। कण प्रदूषण में पीएम 2.5 और पीएम 10 शामिल हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं। पर्टिकुलेट मैटर विभिन्न आकारों के होते हैं और यह मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारण से हो सकता है. स्रोत प्राइमरी और सेकेंडरी हो सकते हैं। प्राइमरी स्रोत में ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल और खाना पकाने का धुआं शामिल हैं। प्रदूषण का सेकेंडरी स्रोत सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रिया हो सकता है। ये कण हवा में मिश्रित हो जाते हैं और इसको प्रदूषित करते हैं। इनके अलावा, जंगल की आग, लकड़ी के जलने वाले स्टोव, उद्योग का धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल वायु प्रदूषण आदि और स्रोत हैं। ये कण आपके फेफड़ों में चले जाते हैं जिससे खांसी और अस्थमा के दौरे पढ़ सकते हैं। उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है।
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