नई दिल्ली, रायटर। पड़ोसी देश म्यांमार में तख्ता पलट के बाद भारत बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। म्यांमार में चल रही 65 करोड़ डालर की परियोजनाओं को ध्यान में रखते भारत सैन्य शासन की खुलेआम आलोचना से बच रहा है।

म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली को भारत अपने हित में मानता, लेकिन सेना से भी वार्ता जारी है

केंद्र सरकार के दो उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार भारत, म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली को अपने हित में मानता है, लेकिन वह सैन्य शासकों से भी निजी बातचीत जारी रखे हुए है।

म्यांमार में एक फरवरी को तख्ता पलट कर सेना सत्ता पर काबिज हो गई

उल्लेखनीय है भारत के इस पड़ोसी देश में एक फरवरी को तख्ता पलट कर सेना सत्ता पर काबिज हो गई है। सेना ने नागरिक सरकार की शीर्ष नेता आंग सान सू की को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया और लोकतंत्र समर्थकों का दमन शुरू कर दिया।

म्यांमार की सेना पर भारत का सीमित प्रभाव है

म्यांमार के सबसे बड़े लोकतांत्रिक पड़ोसी देश होने के बावजूद भारत इस मुद्दे पर बहुत सोच-समझकर प्रतिक्रिया दे रहा है। सरकार के दोनों सूत्रों ने बताया कि म्यांमार की सेना (तमादो) पर भारत का सीमित प्रभाव है इसलिए सैन्य शासकों को वह किसी नसीहत की स्थिति में नहीं है।

भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने का किया आग्रह

रविवार को म्यांमार में पुलिस की गोली से 18 लोगों की जान गई तो भारतीय दूतावास ने ट्वीट कर कहा कि हम सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने का आग्रह करते हैं। इससे पहले भारत की ओर से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने का आग्रह किया गया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने म्यांमार के सभी हितधारकों से देश में लोकतंत्र बहाली को सर्वोच्च वरीयता देने को कहा था।

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