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    रेलवे बोर्ड में अब चेयरमैन शक्तिमान, सदस्यों के पर कतरे

    By Gunateet OjhaEdited By:
    Updated: Thu, 14 Apr 2016 11:58 PM (IST)

    रेल मंत्रालय में रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अब महा शक्तिमान हो गए हैं। सारे महाप्रबंधक अब सीधे चेयरमैन को रिपोर्ट करेंगे। इस कदम के बाद बोर्ड के सदस्य काफी हद तक शक्तिहीन हो गए हैं।

    संजय सिंह, नई दिल्ली। रेल मंत्रालय में रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अब महा शक्तिमान हो गए हैं। सारे महाप्रबंधक अब सीधे चेयरमैन को रिपोर्ट करेंगे। इस कदम के बाद बोर्ड के सदस्य काफी हद तक शक्तिहीन हो गए हैं।

    यह कदम रेलवे में विभागवाद को खत्म करने के लिए बिबेक देबरॉय समिति के सुझाव पर उठाया गया है। इसने अपनी रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड चेयरमैन (सीआरबी) के अलावा महाप्रबंधकों (जीएम) और मंडल रेल प्रबंधकों (डीआरएम) के अधिकार बढ़ाने तथा रेलवे बोर्ड सदस्यों के कार्यो का नए सिरे से विभाजन किए जाने की सिफारिश की थी। इसके तहत डीआरएम और जीएम के अधिकार काफी पहले बढ़ाए जा चुके हैं। सीआरबी के अधिकार बढ़ाने और सदस्यों के कार्यो के पुनर्विभाजन पर अब काम शुरू हुआ है।

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    देबरॉय समिति ने कहा था कि रेलवे बोर्ड चेयरमैन के पास कंपनी के सीईओ जैसे अधिकार होने चाहिए। उसे सभी मेंबरों में 'अग्रणी' मानने के बजाय 'सर्वोपरि' दर्जा दिया जाना चाहिए। उसके पास वीटो पावर होनी चाहिए, ताकि विवाद की स्थिति में उसका निर्णय सर्वमान्य हो।

    इस सुझाव को स्वीकार करते हुए रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने सीआरबी को सर्वशक्तिमान बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। उत्पादन इकाइयों, कोर तथा एनएफआर कंस्ट्रक्शन समेत सभी जीएम से कहा गया है कि वे सदस्यों से मिलने के बजाय सीधे चेयरमैन से मिलेंगे और उनके सामने ही अपनी बातें रखेंगे। सीआरबी चाहेंगे तो संबंधित सदस्य से मिलने को कह सकते हैं, अन्यथा वहीं से बात फाइनल हो जाएगी।

    देबरॉय समिति ने सदस्यों के पुराने वर्गीकरण पर सवाल उठाते हुए इसे वर्तमान दौर में अप्रासंगिक बताया है। समिति ने मेंबरों के कार्य का नए सिरे से बंटवारा किए जाने तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेलीकॉम और पीपीपी के सदस्यों के तीन नए पद सृजित किए जाने की जरूरत बताई है।

    इस सुझाव को फिलहाल सीधे नहीं माना गया है। लेकिन जिस तरह सिगनल और टेलीकॉम के अधिकार मेंबर इंजीनियरिंग को सौंपकर उनके अधिकार बढ़ाए गए हैं तथा मेंबर इलेक्टि्रकल के अधिकारों में कटौती की गई है, उससे लगता है कि देर सबेरयह सिफारिश भी लागू हो जाएगी। मेंबर इलेक्टि्रकल अब केवल इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग और रेलवे इलेक्टि्रफिकेशन की जिम्मेदारी संभालेंगे जबकि मेंबर इंजीनियरिंग को सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े मुद्दे भी डील करने होंगे।

    रेलवे बोर्ड में फिलहाल चेयरमैन के अलावा छह मेंबर हैं। इनका संबंध ट्रैफिक, इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, बिजली, स्टाफ और वित्त (फाइनेंशियल कमिश्नर) से हैं। दूसरी ओर 17 जोनों और 19 उत्पादन/ अनुसंधान इकाइयों के जीएम मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की तरह काम करते हैं।

    देबरॉय समिति के एक अन्य सुझाव के तहत रेलवे बोर्ड की तमाम शाखाओं की संख्या भी घटाई जा रही है। ईआरबी 6, रिकॉर्ड, एफटीएस सेल, इश्यू (डी), रोंको, जी (एकाउंट) शाखाओं को खत्म करने का निर्णय लिया गया है। जबकि कैश 1, 2 और 3 का विलय कर केवल एक कैश शाखा बना दी गई है।