राहुल गांधी मानहानि केस: सावरकर के पोते की याचिका खारिज, खाली निकली मूल CD
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में पुणे की अदालत ने सावरकर के पोते की याचिका खारिज कर दी। अदालत में पेश की गई सीडी खाली पाई गई, जिसमें राहुल गांधी के भाषण का कोई रिकॉर्ड नहीं था। सत्यकी सावरकर ने यूट्यूब वीडियो चलाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
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राहुल गांधी मानहानि केस (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक बयान देने के आरोपी राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला पुणे के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है। अदालत ने वीडी सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर की दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं। क्योंकि, जिस सीडी के आधार पर केस शुरू हुआ, वह खाली पाई गई।
दरअसल, शिकायतकर्ता/अभियोजन पक्ष के एक वकील द्वारा गवाह की प्रारंभिक परीक्षा के दौरान, 2023 में लंदन में राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक भाषण के वीडियो वाली सीडी को साक्ष्य के रूप में जमा किया गया था। यह सीडी जब कोर्ट में चलाई गई तो वो नहीं चली। उसमें कोई कंटेंट ही नहीं था।
ऐसी कोई अतिरिक्त सीडी रिकॉर्ड में नहीं
पूणे की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सत्यकी सावरकर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर के बारे में राहुल गांधी के कथित 2023 के अपमानजनक भाषण का एक यूट्यूब वीडियो चलाने की मांग की थी। कोर्ट ने जब सीडी चलाने को कहा तो सीडी नहीं चली, जिसके बाद याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी कोई अतिरिक्त सीडी रिकॉर्ड में नहीं है।
हालांकि, सत्यकी सावरकर के वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत से यूट्यूब चैनल का मूल लिंक चलाने का अनुरोध किया, लेकिन राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने इस अनुरोध का विरोध किया।
क्या कहना है धारा 65-बी
अदालत अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने सीडी के संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के अनुसार प्रमाण पत्र दाखिल किया है, लेकिन यूआरएल या वेब लिंक धारा 65-बी के अनुसार प्रमाण पत्र द्वारा समर्थित नहीं है इसलिए इसे साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
27 नवंबर को सत्यकी सावरकर ने अदालत से अनुरोध किया कि अदालत को उपलब्ध कराई गई अतिरिक्त सीडी को चलाया जाए। हालांकि, अदालत ने कहा कि ऐसी कोई सीडी रिकॉर्ड में नहीं है। वहीं, सावरकर के वकील ने 'खाली सीडी' और गायब अतिरिक्त सीडी की न्यायिक जांच की मांग की है।

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