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    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महिलाओं की शिक्षा पर दिया जोर, कहा- अर्थव्यवस्था में वह दे सकती हैं बड़ा योगदान

    By AgencyEdited By: Anurag Gupta
    Updated: Sun, 06 Aug 2023 03:54 PM (IST)

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को मद्रास विश्वविद्यालय के 165वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस समय लगभग 1.85 लाख छात्र विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ रहे हैं और उनमें से 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं। उन्होंने कहा कि हम लड़कियों की शिक्षा में निवेश करके अपने देश की प्रगति में निवेश कर रहे हैं।

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    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मद्रास विश्वविद्यालय के 165वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित (फोटो: पीटीआई)

    चेन्नई, पीटीआई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को कहा कि शिक्षित महिलाएं अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे सकती हैं, विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान कर सकती हैं और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने मद्रास विश्वविद्यालय के 165वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस समय लगभग 1.85 लाख छात्र विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ रहे हैं और उनमें से 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं।

    क्या कुछ बोलीं राष्ट्रपति मुर्मु?

    उन्होंने आगे कहा,

    मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 105 छात्रों में से 70 फीसद छात्राएं हैं।

    राष्ट्रपति ने कहा कि मद्रास विश्वविद्यालय लैंगिक समानता का एक ज्वलंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हम लड़कियों की शिक्षा में निवेश करके अपने देश की प्रगति में निवेश कर रहे हैं।

    'अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दे सकती हैं शिक्षित महिलाएं'

    उन्होंने कहा कि शिक्षित महिलाएं अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दे सकती हैं, विभिन्न क्षेत्रों का नेतृत्व कर सकती हैं और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

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    राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि 1857 में स्थापित इस विश्वविद्यालय को भारत के सबसे पुराने आधुनिक विश्वविद्यालयों में से एक होने का गौरव प्राप्त है।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा,

    यह गर्व की बात है कि छह पूर्व राष्ट्रपति इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं जिनमें एस राधाकृष्णन, वीवी गिरि, नीलम संजीव रेड्डी, आर वेंकटरमन, केआर नारायणन और ए पी जे अब्दुल कलाम शामिल हैं।

    देश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और देश के पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं प्रतिष्ठित महिलाएं सरोजिनी नायडू और दुर्गाबाई देशमुख, नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी वी रमन और एस चंद्रशेखर, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम पतंजलि शास्त्री और जस्टिस के सुब्बाराव भी कभी मद्रास विश्वविद्यालय के छात्र थे। इससे पहले मुर्मु को राजभवन में गार्ड आफ आनर दिया गया।