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    'इस घटना ने अंतरात्मा को झकझोर दिया', प्रयागराज में बुलडोजर एक्शन पर यूपी सरकार को फटकार

    By Agency Edited By: Piyush Kumar
    Updated: Mon, 24 Mar 2025 10:58 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध निर्माण ढहाने की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर और अपील का समय दिए बिना ही मकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया।

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    प्रयागराज में अवैध निर्माण ढहाने की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंंता जाहिर की है।(फोटो सोर्स: जागरण)

    पीटीआई, नई दिल्ली। प्रयागराज में उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध निर्माण ढहाने की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इस कार्रवाई से उसके अंतरात्मा को झटका लगा है।

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    जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर और अपील का समय दिए बिना ही मकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया।

    हाई कोर्ट ने की थी याचिका खारिज

    सुप्रीम कोर्ट ने वकील जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिनके घर ध्वस्त कर दिए गए थे। इन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    कोर्ट ने क्या कहा?

     पीठ ने कहा, "यह देखकर हमारे अंतरात्मा को झटका लगा है कि किस तरह से आवासीय परिसर को मनमाने तरीके से ध्वस्त कर दिया गया। जिस तरीके से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, वह चौंकाने वाला है। अदालतें ऐसी प्रक्रिया को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। अगर हम एक मामले में बर्दाश्त करेंगे तो यह जारी रहेगा।"

    कोर्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ताओं को अपने खर्च पर घर दोबारा बनाने की अनुमति देगा, लेकिन उन्हें कुछ शर्तें माननी होंगी। उन्हें एक हलफनामा देना होगा कि वे अपीलीय अधिकारी के समक्ष निर्धारित समय के भीतर अपील करेंगे, भूखंड पर अधिकार का दावा नहीं करेंगे और किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं करेंगे। अगर उनकी अपील खारिज हो जाती है, तो उन्हें अपने खर्च पर घरों को फिर से तोड़ना होगा।

    'उचित प्रक्रिया' का पालन किया जाएगा: अटॉर्नी जनरल

    कोर्ट ने मामले को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया ताकि याचिकाकर्ता हलफनामा दाखिल कर सकें। इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने नोटिस देने में 'उचित प्रक्रिया' का पालन करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार के लिए अनधिकृत कब्जों को नियंत्रित करना कठिन है।

    शीर्ष अदालत ने इससे पहले प्रयागराज में बिना उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए मकानों को ध्वस्त करने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि यह कार्रवाई चौंकाने वाला है।याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा था कि राज्य सरकार ने यह सोचकर कि जमीन गैंगस्टर अतीक अहमद की है गलत तरीके से मकानों को ध्वस्त कर दिया। अतीक की 2023 में हत्या कर दी गई थी।

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