जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नामीबिया से आए चीतों को भारतीय जमीं पर स्वस्थ देख अब दक्षिण अफ्रीका से जल्द ही और चीतों को लाने की तैयारी है। वैसे तो चीता प्रोजेक्ट के तहत पांच सालों में करीब 30-35 चीतों को लाने की योजना बनाई है लेकिन अभी दक्षिण अफ्रीका से सिर्फ बारह और चीते लाए जाएंगे। दोनों देशों के बीच इसे लेकर सहमति भी बन गई है। इस महीने के मध्य तक दोनों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर हो जाएंगे।

बारह चीतों को किया गया चिन्हित

चीतों की नई खेप नामीबिया से आए चीतों के क्वारीटीन अवधि जो एक महीने की है, के पूरा होने के बाद ही लाए जाएंगे। दक्षिण अफ्रीका से लाए जाने वाले सभी बारह चीतों को चिन्हित कर लिया गया है। साथ ही उन सभी की विशेष निगरानी भी शुरू कर दी गई है। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले सभी चीतों को भी मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर अभयारण्य में ही रखा जाएगा।

दक्षिण अफ्रीका से बारह चीतों को लाने की योजना

चीतों को नई खेप क्वारीटीन अवधि के लिए बनाए गए विशेष बाड़ों के खाली होने के बाद ही लाया जाएगा। हालांकि अभी कूनों में इसकी संख्या करीब आठ ही है। जबकि दक्षिण अफ्रीका से बारह चीतों को लाने की योजना है। ऐसे में चार नए बाड़े की भी तैयारी शुरू कर दी है। नामीबिया से चीतों को 17 सितंबर को लाया गया था। इन चीतों को पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने हाथों से छोड़कर देश में चीता प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी।

कूनो में सुनाई दे सकती है चीता शावकों की आवाज

इस बीच मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से 15 दिन (पखवाड़े) के भीतर ही चीता प्रोजेक्ट से जुड़ी नई और अच्छी खबर आई है। 'आशा' नाम की चीता वह नाम को सार्थक करती नजर आ रही है। आशा गर्भवती है। यदि सब कुछ आशानुरूप रहा तो आगामी नए साल की शुरुआत में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता शावकों की आवाज सुनाई दे सकती है। आशा में गर्भावस्था के सारे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। पशु चिकित्‍सकों की टीम आशा के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो गई है।  

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Edited By: Krishna Bihari Singh

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