नई दिल्ली, अमित शर्मा। आपको चक दे इंडिया फिल्म याद है? वही, वुमन हॉकी वाली। उसमें नॉर्थ-ईस्ट की दो खिलाड़ियों के साथ रेसिज्म के कुछ सीन थे। एक बहुत अच्छा डायलॉग भी था, मेहमान कहने पर। वो ये कि आपको कैसा लगेगा अपने ही देश में मेहमान कहे जाने पर..!

गाहे बगाहे ये वाकये होते रहते हैं। अभी हाल ही में भी हुआ सोशल मीडिया पर। दस साल की एनवायरमेंट एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम ने ताजमहल के पीछे यमुना नदी के किनारे से एक फोटो पोस्ट की। इस तस्वीर में लिसिप्रिया के हाथ में एक तख्ती थी जिस पर लिखा था 'Behind the beauty of Taj Mahal is plastic pollution.' लिसिप्रिया अपने एनवायर्मेंट मिशन के तहत इस तरह के संदेश देती रहती हैं।

हुआ ये कि ट्विटर पर एक नेताजी ने इस फोटो को शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार को उलहाना दिया। 10 साल की बच्ची के संदेश को राजनीति में भिगो कर ट्वीटर पर परोसा। नेताजी कौन हैं किस पार्टी के हैं, ज्यादा मायने नहीं रखता, वो तो आप ट्वीट के स्क्रीन शॉट या लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं। मायने ये रखता है कि उन्होंने लिखा क्या। उन्होंने अपने ट्वीट के अंत में लिखा कि विदेशी पर्यटक द्वारा सरकार को आईना दिखाना बेहद शर्मनाक है। पहली लाइन भी कुछ ऐसी ही थी।

जाहिर सी बात है कि जब ये ट्वीट इस 10 साल की एनायरमेंट एक्टिविस्ट की नजर में आया तो रिएक्शन अच्छा नहीं रहा होगा। लिहाजा लिसिप्रिया कंगुजम ने नेताजी की पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा- 'Hello Sir, I'm a proud Indian. I'm not a foreigner.' बहुत ही शालीनता से लिसिप्रिया कंगुजम ने जता दिया कि मैं विदेशी पर्यटक नहीं हूं और भारतीय होने पर मुझे गर्व है। इस घटना पर लिसिप्रिया कितनी आहत हुई होंगी ये आप उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर चैक कर सकते हैं, जहां उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के बाशिंदों के साथ होने वाले भेदभाव पर नेताजी की इसी पोस्ट को शेयर करते हुए मन की बात लिखी। लिचि ने लिखा- 'But I'm a proud Indian. Stop such racist attitude towards North East People. This is unacceptable.'

जाहिर सी बात है कि नेताजी को कमेंट सेक्शन में यूजर आड़े हाथ ले रहे हैं। संभवतः वो वायरल होती अपनी इस हरकत पर बैकफुट पर आएं। आना भी चाहिए।

इस पोस्ट को देखने के बाद और लिसिप्रिया कंगुजम के संयमित जवाब के बाद जब उनका अकाउंट खंगाला तो फख्र से सर ऊंचा हुआ। एक दस साल की बच्ची क्लाइमेट बचाने की जंग में क्या क्या नहीं कर रही। फोन पर बात की तो फिलवक्त ये आसाम में है। दूसरे बच्चों की तरह समर वेकेशन्स पर नहीं, आसाम बाढ़ में लोगों की मदद करने के लिए। लिसिप्रिया कंगुजम गांधी जी के जन्म की तारीख पर ही इस धरती पर आईं। सन अलग है। 2 अक्टूबर 2011 को जन्मी लिसिप्रिया क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेथा थंबर्ग से खासी प्रभावित हैं। नन्ही सी उम्र में स्पेन के मेड्रिड में यूनाइटेड नेशन्स क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस का हिस्सा रह चुकी हैं। अलबत्ता उस ईवेंट की सबसे कम उम्र की पार्टिसिपेंट थीं। लिसिप्रिया कंगुजम क्लाइमेट चेंज को लेकर स्कूल सिलेबस में चैप्टर जुड़वाने को लेकर कैंपेन चला रही हैं। कई बड़े अवॉर्ड उनके नाम हैं। क्लाइमेट चेंज लॉ के लिए संसद के बाहर भी प्रदर्शन करके चर्चा में आईं थीं और 2020 में दिल्ली एयर पोल्यूशन को लेकर पूरी रात विजय चौक पर धरने में भी शामिल हो चुकी हैं।

लिसिप्रिया सैवन सिस्टर स्टेट्स में से एक मणिपुर में पैदा हुईं। भुवनेश्वर के बाद अब दिल्ली में पढ़ाई चल रही है। इस खबर के लिए लिसिप्रिया कंगुजम से बात हुई तो सवाल करना लाजिमी था कि दस साल की उम्र में सड़कों पर उतर रही हो, तो पढ़ाई कैसे मैनेज होती है। लिसिप्रिया का जवाब है कि अभी तो छुट्टियां चल रही हैं। स्कूल डेज में शनिवार रविवार कैंपेन में रहती हूं। और बाकि स्कूल के बाद शाम का वक्त सोशल वर्क के लिए है। पढ़ाई और सोशल वर्क दोनों को मैनेज करने में दिक्कत होती है, पर कर लेती हूं।

लिसि चाहती हैं कि जितनी जल्दी हो हमारा देश क्लाइमेट लॉ लेकर आए, ताकि इस धरती को तबाह होने से बचाएं। 2070 तक भारत को जीरो कार्बन पॉलिसी के लक्ष्य के लिए अभी से जुटना होगा। लिसिप्रिया कंगुजम का सपना है कि हर स्टूडेंट हर साल कम से कम 10 पेड़ लगाए और उनका खयाल रखे। देश में 350 मिलियन स्टूडेंट्स हैं, इस लिहाज से हर साल 3.5 मिलियन पेड़ हर साल देश में लगेंगे। सच में सोचिए, 5 से 10 साल में कितना हरा हो जाएगा हमारा भारत।

अब बात फिर से उसी मुद्दे की, जहां से यह खबर शुरू हुई थी। अपने ही देश में विदेशी कहे जाने के सवाल पर लिसिप्रिया कंगुजम कहती हैं कि ये पहली बार नहीं हुआ है कि मुझे विदेशी या चाइनीज कहा गया हो। कुछ लोग देश को बांटने में लगे हैं। हम नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को ये व्यवहार आहत करता है, इसे रोकना चाहिए।

10 साल की बच्ची आहत है। अगर नेता जी या ऐसे सभी लोग जो जाने अनजाने में हमारे अपनो को विदेशी कह देते हैं, अपनी गलती सुधार में 10 पेड़ लगा दें, तो कितनी शानदार सजा हो। यकीनन इस सजा या प्रायश्चित पर ये दस साल की बच्ची लिसिप्रिया कंगुजम तो मुस्कुराने लगेगी। क्यों क्या कहते हैं आप?

Edited By: Tilakraj