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    PM Shree School: स्कूली शिक्षा वह नींव है जिस पर भारत की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था नया आकार लेगी

    By Sanjay PokhriyalEdited By:
    Updated: Tue, 30 Aug 2022 01:35 PM (IST)

    PM Shree School देश भर में जल्द ही पीएम श्री योजना लागू होगी। स्कूली शिक्षा वह नींव है जिस पर भारत की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था नया आकार लेगी। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पीएम श्री योजना की महत्ता और बढ़ जाती है।

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    PM Shree School: नई शिक्षा नीति के तहत कई परिवर्तनों को पहले पीएम श्री स्कूलों में लागू किया जाएगा। प्रतीकात्मक

    नरपतदान चारण। PM Shree School केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय ने देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने के उद्देश्य से नई शिक्षा नीति के तहत शुरू की जाने वाली महत्वाकांक्षी पीएम श्री योजना को लांच करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुझावों के आधार पर ही इसका खाका तैयार किया गया है। इसके लिए सरकारी स्कूलों के उन्नयन के लिए वित्त मंत्रलय सहित केंद्र सरकार से जुड़े दूसरे मंत्रलयों और राज्यों के साथ अंतिम दौर की चर्चा चल रही है। ये स्कूल देश और सभी राज्यों के लिए माडल होंगे। सितंबर में केंद्र सरकार इसे देश के सभी राज्यों में लांच करने की तैयारी में है।

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    बीते जून में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री शिक्षा धर्मेद्र प्रधान ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार छात्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से अत्याधुनिक ‘पीएम श्री स्कूल’ स्थापित करने की योजना बना रही है। ये स्कूल अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की प्रयोगशाला के रूप में काम करेंगे। इस कार्यक्रम में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों ने भाग लिया था। अब इस योजना को लागू करने की अंतिम तैयारी चल रही है।

    वर्ष 2024 तक देश के सभी राज्यों में 15 हजार से भी अधिक पीएम श्री स्कूल स्थापित किए जाने का लक्ष्य है। इनका संचालन केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय के दिशानिर्देशों के अनुसार होगा। ये केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर स्थापित किए जाएंगे। इन स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होगी। इस योजना के तहत कोई नया स्कूल स्थापित नहीं होगा। इन स्कूलों के लिए नया इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बजाय पुराने सरकारी स्कूलों को ही अपग्रेड किया जाएगा। साथ ही, ऐसे स्कूल जिनका बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत होगा, उन्हें पीएम श्री स्कूलों में परिवर्तित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं सरकारी स्कूलों के परिसर और ढांचे को पीएम श्री स्कूलों की आवश्यकता के अनुसार सुंदर, मजबूत, आकर्षक और बड़ा बनाया जाएगा।

    शिक्षा मंत्रलय के अनुसार देश के सभी विकास खंडों में एक प्री-प्राइमरी और एक प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड किया जाएगा। वहीं, प्रत्येक जिला स्तर पर एक माध्यमिक और एक वरीय माध्यमिक स्कूल को इस स्कीम से जोड़ा जाएगा। इन स्कूलों को देश के माडल स्कूल के तर्ज पर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों और संबंधित विशेषज्ञों से भी राय मांगी गई है। इन स्कूलों का एक और उद्देश्य यह है कि देश भर के सामान्य परिवार के बच्चों को सरकारी स्कूल में गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने का अवसर प्रदान किया जा सके, ताकि इसके लिए उन्हें घर से दूर नहीं जाना पड़े।

    स्कूलों की संरचना : इन स्कूलों में प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा कार्यक्रम के साथ कौशल विकास को एकीकृत करने, और मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने पर बल दिया जाएगा। ये वे उपाय हैं जो 21वीं सदी के वैश्विक नागरिकों को प्रशिक्षण देने के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा इसमें सभी भाषाओं पर जोर दिया जाएगा, क्योंकि सरकार के अनुसार, कोई भी भाषा हंिदूी या अंग्रेजी से कमतर नहीं है। इन स्कूलों में केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि इसके साथ ही कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    विशेषता : विश्व स्तर की शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस योजना का प्रारूप तैयार किया गया है। इसलिए पीएम श्री स्कूलों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, ताकि छात्र-छात्रएं किताबी कीड़ा बनने की बजाय प्रत्यक्ष प्रयोगों से सीख और अनुभव हासिल करें। इससे उनका आत्मविश्वास मजबूत होगा। विषयों को ऐसे स्वरूप में पढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों में नवीन जिज्ञासा पैदा की जा सके। इस दौरान छात्रों के बीच चर्चा आधारित शिक्षा को अनिवार्य किया जाएगा। एकीकृत और वास्तविक जीवनशैली पर स्कूलों की स्थापना की जाएगी। प्री-प्राइमरी और प्राइमरी स्तर के बच्चों में खेल पर अधिक फोकस किया जाएगा, ताकि शैक्षिक के साथ ही उनमें शारीरिक विकास हो सके और इससे बच्चों का आत्मबल भी मजबूत हो।

    नई शिक्षा नीति में पुराने 102 के प्रारूप को खत्म कर दिया गया है और अब इसे 5334 में बदल दिया गया है। पीएम श्री स्कूलों में इसी के आधार पर शिक्षण कार्य होगा। अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी यानी बच्चे को शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए पांच वर्ष का समय होगा।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री का देश में शिक्षा के विकास के संबंध में कहना है कि अगले 25 वर्ष भारत को एक ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं जो वैश्विक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में हम सभी को मिलकर काम करना है, एक-दूसरे के अनुभवों और सफलताओं से सीखना है, ताकि सीखने को और अधिक जीवंत बनाया जा सके। वैसे भी, बच्चे ही देश का भविष्य हैं, इसलिए उनकी शुरुआती पढ़ाई का आधार मजबूत रहना चाहिए, तब आगे चलकर वह देश के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे। दूसरी तरफ, समाज के लिए शिक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती। तेजी से आगे बढ़ती दुनिया से कदम मिलाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग हमेशा से रही है। इसलिए नई शिक्षा नीति इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पीएम श्री योजना की महत्ता और बढ़ जाती है।

    [वरिष्ठ अध्यापक]