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    INS Vikrant: छत्रपति शिवाजी महाराज को क्यों कहा जाता है 'फादर आफ नेवी', पीएम मोदी ने भी किया जिक्र

    By Mahen KhannaEdited By:
    Updated: Fri, 02 Sep 2022 12:20 PM (IST)

    पीएम मोदी ने कोच्चि में आज भारतीय नेवी को देश के पहले स्वदेशी युद्धपोत आइएनएस विक्रांत सौंपा। पीएम मोदी ने इस दौरान नौसेना के जनक कहे जाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज को भी याद किया। आइए जानें आखिर शिवाजी को ऐसा क्यों कहा जाता है।

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    नौसेना के जनक छत्रपति वीर शिवाजी महाराज।

    नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। पीएम मोदी ने कोच्चि में एक कार्यक्रम में भारतीय नेवी को देश के पहले स्वदेशी युद्धपोत आइएनएस विक्रांत सौंपा। पीएम मोदी ने इसके साथ ही नौसेना के ध्‍वज के नए निशान का भी अनावरण किया। पीएम ने कार्यक्रम में नौसेना के जनक कहे जाने वाले छत्रपति वीर शिवाजी महाराज को भी याद किया। पीएम ने कहा कि शिवाजी महाराज ने समुद्री सामर्थ्य के दम पर ऐसी नौसेना का निर्माण किया था जो दुश्मनों की नींद उड़ाकर रखती थी। शिवाजी महाराज को फादर आफ इंडियन नेवी क्यों कहा जाता है, आइए जानते हैं।

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    समंदर की रक्षा के लिए की थी नेवी की स्थापना

    भारत की नौसेना का क्रेडिट शिवाजी को दिया जाता है। माना जाता है कि मराठा शासक छत्रपति शिवाजी ने ही भारतीय नौसेना की नींव रखी थी। शिवाजी के मराठा शासन के दौरान 1674 में नेवी फोर्स की स्‍थापित की गई थी। छत्रपति शिवाजी ने समंदर की रक्षा के लिए कोंकण और गोवा में एक मजबूत नेवी की स्‍थापना की थी। तटीय क्षेत्रों के आसपास शिवाजी के नेवल अड्डों को हिंदू और मुस्लिम दोनों एडमिरलों द्वारा नियंत्रित किया जाता था ताकि इस हिस्‍से को अरब, पुर्तगाली, ब्रिटिश और समुद्री लुटेरों से बचाया जा सके।

    सन 1654 में पहला जहाज बना

    बता दें कि पुर्तगाली पश्चिमी क्षेत्र से भारत में अपना प्रभुत्‍व कायम करना चाहते थे। वे भारत में व्‍यापार को नियंत्रित करना चाहते थे जिसको रोकने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक मजबूत नेवी की अहमियत पर बल दिया था। इसके मद्देनजर पहला मराठा जहाज सन 1654 में तैयार हुआ था।

    शिवाजी के पास थे 500 जहाज

    शिवाजी महाराज ने सन 1657-58 तक कई जहाजों का निर्माण कराया था। उन्होंने 20 वारशिप्‍स तैयार करवाकर प्रशिक्षित लोगों को इसका काम सौंपा था। जंजीरा कोस्‍ट लाइन पर भी इसके इस्तेमाल से सिद्दीस के खिलाफ कई लड़ाईयां लड़ीं गईं थी। शिवाजी के बेड़े में दो स्‍क्‍वाड्रन थीं और प्रत्येक में 200 जहाज थे।