छत्तीसगढ़: 'नक्सलवाद के खात्मे के बाद पहली बार...' बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ पीएम मोदी ने मनाई दीवाली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ दीवाली मनाई। उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे के लिए ...और पढ़ें
HighLights
प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर में सुरक्षा बलों संग दीवाली मनाई।
नक्सलवाद के खात्मे में जवानों के योगदान की सराहना की।
नक्सलवाद मुक्त बस्तर में यह पहली दीपावली है।
डिजिटल डेस्क, रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीवाली का पावन पर्व मनाया।
कभी नक्सलवाद का सबसे बड़ा गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के पराक्रम और योगदान को सराहते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आपके बलिदानों और अटूट निष्ठा की वजह से ही हमने यहां से नक्सलवाद के आतंक को पूरी तरह खत्म किया है। उन्होंने कहा कि इस इलाके से नक्सलवाद के खात्मे के बाद यह पहली दिवाली है।
बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ दीवाली मनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक एलान किया है। उन्होंने 2026 की दीपावली को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि यह पहला मौका है जब देश ने दशकों से चले आ रहे नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल कर ली है।
आज देश का हर जिला नक्सल मुक्त हो चुका है। पीएम ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक समय था जब नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी मानकर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था, लेकिन 2014 के बाद मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति ने पूरी तस्वीर बदल कर रख दी है।
47 साल में पहली बार बीते एक साल में कोई शहादत नहीं
जवानों के अदम्य साहस को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने एक बड़ी और राहत देने वाली जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले 47 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीते एक साल के दौरान ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ (CRPF) के किसी भी जवान की जान नहीं गई। 2004 से 2013 के बीच के भयावह हालातों की याद दिलाते हुए पीएम ने कहा कि उस दौरान नक्सलियों के मारे जाने से ज्यादा हमारे जवानों की शहादत के आंकड़े सामने आते थे। आज मिली यह कामयाबी सरकार की सही नीतियों, दृढ़ संकल्प और सुरक्षाबलों के शौर्य का नतीजा है।
जब साल भर में होते थे दो हजार हमले
आतंक के पुराने दौर का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि माओवादियों के खिलाफ यह लड़ाई कतई आसान नहीं थी। नक्सलियों ने दहशत फैलाकर आम जनता से उनका वोटिंग का अधिकार तक छीन लिया था। हालात इतने खराब थे कि एक ही साल में नक्सली हमलों का आंकड़ा 2,000 तक पहुंच जाता था।
साल 2010 के दर्दनाक वाकये को याद करते हुए पीएम ने बताया कि कैसे दंतेवाड़ा में नक्सलियों से लोहा लेते हुए 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। उसी साल एक अन्य क्रूर घटना में 44 बेगुनाह नागरिकों को भी मौत के घाट उतार दिया गया था।
2014 के बाद बदली दिशा, दुश्मनों को मिला करारा जवाब
पीएम ने कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए मजबूत इरादे और एक सटीक रणनीति के साथ दुश्मनों का सामना करना जरूरी था। साल 2014 में जब जनता ने उन्हें 'प्रधानसेवक' के रूप में देश की सेवा का मौका दिया, तब सरकार ने वो राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जिसकी लंबे समय से कमी थी। इसी का परिणाम है कि आज करोड़ों भारतीयों ने नक्सलवाद के खौफ को हमेशा के लिए पीछे छोड़ दिया है।
आंतरिक सुरक्षा मजबूत हो: पीएम मोदी
सुरक्षाकर्मियों की तुलना सरहद पर तैनात सेना से करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर पुलिस और सुरक्षाबल जो भूमिका निभाते हैं, वह देश की अखंडता के लिए बेहद अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा चाक-चौबंद होती है, तो बाहरी दुश्मनों की सिर उठाने की हिम्मत नहीं होती।
140 करोड़ देशवासियों की ओर से आभार प्रकट करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जवानों के इस निस्वार्थ त्याग और बलिदान पर पूरे देश को गर्व है। उन्होंने देश के कोने-कोने में तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
जवानों के साथ पीएम मोदी की दिवाली
साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने हर साल सीमा और दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने की अनूठी परंपरा निभाई है। बस्तर से पहले उन्होंने इन स्थानों पर जवानों के बीच यह पर्व मनाया है।
- 2014: सियाचिन बेस कैंप, लद्दाख
- 2015: डोगराई वार मेमोरियल, पंजाब सीमा
- 2016: सुमदो, किन्नौर, हिमाचल प्रदेश
- 2017: गुरेज घाटी, जम्मू-कश्मीर
- 2018: हर्षिल, उत्तराखंड
- 2019: राजौरी, जम्मू-कश्मीर
- 2020: लोंगेवाला, राजस्थान
- 2021: नौशेरा, जम्मू-कश्मीर
- 2022: कारगिल, लद्दाख
- 2023: लेप्चा, हिमाचल प्रदेश
- 2024: कच्छ, गुजरात
बस्तर में विकास की नई सुबह
करनपुर में जवानों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दशकों तक जिस इलाके ने लाल आतंक का दंश झेला, वह आज शांति और प्रगति की ओर बढ़ रहा है। देश के रक्षकों के समर्पण को सराहते हुए, पीएम ने उनके शौर्य को नमन किया और देशवासियों की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं।
हर साल जवानों के बीच दिवाली मनाने की परंपरा जारी
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी उन्होंने देश के पहरेदारों के साथ ही त्योहार मनाने का फैसला किया।
इससे पहले शनिवार को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने देशवासियों को दीवाली की शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि की कामना की थी।
बस्तर लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का मुख्य केंद्र रहा है, जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सलियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में सबसे अहम भूमिका निभाई है।
मार्च में घोषित हुई थी नक्सलमुक्ति
केंद्र सरकार ने 31 मार्च को शीर्ष नक्सली कमांडरों के सफाए और सैकड़ों कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद देश को नक्सल समस्या से मुक्त घोषित किया था। इसी क्रम में सीआरपीएफ ने हाल ही में लगातार 12 महीनों तक ऑपरेशन के दौरान किसी भी जवान के हताहत न होने यानी जीरो कैजुअल्टी की उपलब्धि दर्ज की है।
सीआरपीएफ के महानिदेशक जी. पी. सिंह ने इस सफलता का श्रेय जवानों को मिले आधुनिक उपकरणों, उन्नत प्रशिक्षण, सटीक रणनीतिक योजना और घायल होने पर त्वरित मेडिकल सहायता व निकासी को दिया।
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