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लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई, बताएं भाजपा के दिग्गज नेता की 2 खूबियां

Published: Sun, 08 Nov 2026 12:06 PM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के 100वें वर्ष में प्रवेश पर एक विशेष आलेख लिखा, जिसमें उनके असाधारण राजनीतिक ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पीएम मोदी ने आडवाणी के असाधारण राजनीतिक सफर और योगदान को सराहा।

  2. वैचारिक स्पष्टता और स्यूडो-सेक्युलरिज्म को बेनकाब करना उनकी विशेषता।

  3. अटल-आडवाणी की जोड़ी, राम मंदिर आंदोलन, भारत रत्न का जिक्र।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन  जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष आलेख लिखकर उनके असाधारण राजनीतिक सफर और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद किया।

इस आलेख में पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के व्यक्तित्व की दो ऐसी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया है, जो उन्हें भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान दिलाती हैं।

पहली, उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक तीक्ष्णता, जो उनके भाषणों व लेखों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। दूसरी, वह सुविचारित तरीका, जिससे उन्होंने लंबे समय तक भारतीय राजनीति के एक बड़े हिस्से द्वारा पोषित स्यूडो-सेक्युलरिज्म की असलियत को बेनकाब किया।

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अटल-आडवाणी की जोड़ी ने शून्य से संगठन खड़ा करने का जज्बा

प्रधानमंत्री ने लिखा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति में आपसी सहयोग की एक अनूठी मिसाल पेश की। इतिहास में ऐसे उदाहरण बेहद दुर्लभ हैं जहां दो बड़े राजनेता बिना किसी प्रतिस्पर्धा के दशकों तक एक-दूसरे के पूरक बनकर साथ काम करें। दोनों नेताओं की इस साझेदारी ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी।

8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन जन्मे आडवाणी जी ने 1947 में विभाजन के दौरान सिंध में अपनी जानी-पहचानी दुनिया को खोने का दर्द झेला था। इसके बावजूद, बिना किसी कड़वाहट के उन्होंने जीवन को नए सिरे से शुरू किया।

इसी क्षमता के बल पर उन्होंने पहले जनसंघ को मजबूत किया और फिर भाजपा की मजबूत नींव रखी। आडवाणी जी के पार्टी अध्यक्ष रहते हुए ही 1989 में कांग्रेस 400 से घटकर 200 सीटों के नीचे आ गई और 1996 में भाजपा पहली बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।

आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा

आरएसएस प्रचारक के रूप में राजस्थान से काम शुरू करने के बाद आडवाणी जी दिल्ली पहुंचे और अटल जी के साथ मिलकर संगठन को आगे बढ़ाया। 1967 में वह दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के चेयरमैन बने और 1970 से उनकी संसदीय पारी शुरू हुई।

पीएम मोदी ने 1991 के लोकसभा चुनाव को याद करते हुए बताया कि आडवाणी जी ने गांधीनगर से चुनाव लड़ा था, जहां संगठन के कार्यकर्ता के रूप में उन्हें आडवाणी जी के नामांकन पत्र तैयार करने और पूरे चुनाव अभियान में सहयोग देने का सौभाग्य मिला था।

पीएम मोदी ने 1975 के आपातकाल को आडवाणी जी के जीवन का एक अहम मोड़ बताया। वह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष में सबसे आगे रहे। जेल के अपने अनुभवों को आडवाणी जी ने अपनी पुस्तक 'अ प्रिजनर्स स्क्रैप-बुक' में कलमबद्ध किया, जिसके एक अध्याय में उन्होंने 1975 के भारत और 1933 के नाजी जर्मनी के हालात की चौंकाने वाली समानताओं का सटीक विश्लेषण किया था।

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सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1977 की जनता पार्टी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री और बाद में देश के गृह मंत्री व उप प्रधानमंत्री के रूप में आडवाणी जी का कार्यकाल बेहद प्रभावी रहा। उन्होंने देश के सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कानून सुनिश्चित कराया।

सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा को भारतीय समाज की दिशा बदलने वाला ऐतिहासिक कदम बताते हुए पीएम ने कहा कि उन्हें इस यात्रा की रूपरेखा तैयार करने से लेकर इसके संचालन तक आडवाणी जी के साथ रहने का अवसर मिला।

आडवाणी जी की बिहार में गिरफ्तारी और उसके बाद गुजरात में चिमनभाई पटेल सरकार से भाजपा द्वारा समर्थन वापस लिए जाने की घटना यह संदेश देती थी कि विचारधारा और राम मंदिर के मुद्दे पर पार्टी कभी कोई समझौता नहीं करेगी। इसी संकल्प का परिणाम है कि आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है।

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सादगी, सांस्कृतिक रुझान से भारत रत्न का सफर

पीएम मोदी ने आडवाणी जी की सादगी को रेखांकित करते हुए बताया कि नवनिर्माण आंदोलन के बाद वह जूनागढ़ में एक महीने तक एक साधारण कार्यकर्ता की तरह रहे थे।

सार्वजनिक जीवन में शुचिता के प्रतीक आडवाणी जी अध्ययनशील पाठक होने के साथ-साथ सिनेमा और रंगमंच के बड़े पारखी और उत्साही फिल्म समीक्षक भी रहे हैं। अपनी सिंधी संस्कृति से जुड़े रहने के साथ उन्होंने लेह के पास सिंधु दर्शन पूजा की शुरुआत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री ने आडवाणी जी की दिवंगत पत्नी कमला आडवाणी के योगदान को भी याद किया, जो उनके पूरे सार्वजनिक जीवन में संबल का प्रमुख आधार रहीं। 2024 में देश द्वारा उन्हें 'भारत रत्न' दिए जाने का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

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