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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gay Marriage: समलैंगिक विवाह के फैसले पर SC में फिर होगी सुनवाई, कोर्ट समीक्षा याचिकाओं पर विचार के लिए तैयार

By Jagran NewsEdited By: Versha Singh
Published: Thu, 23 Nov 2023 01:15 PM (IST)Updated: Thu, 23 Nov 2023 02:10 PM (IST)

समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले 17 अक्टूबर के फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली ...और पढ़ें

समलैंगिक विवाह के फैसले की समीक्षा के लिए याचिका का SC में उल्लेख
समलैंगिक विवाह के फैसले की समीक्षा के लिए याचिका का SC में उल्लेख

पीटीआई, नई दिल्ली। समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले 17 अक्टूबर के फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली एक याचिका गुरुवार को खुली अदालत में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की दलीलों पर ध्यान दिया और कहा कि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग करने वालों की शिकायतों के निवारण के लिए समीक्षा याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की जरूरत है।

समलैंगिक जोड़ों को विवाह समानता का अधिकार देने से इनकार करने वाले शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 28 नवंबर को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता खुली अदालत में सुनवाई चाहता है। कोर्ट का कहना है कि वह पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग करने वाली याचिकाकर्ता की याचिका पर गौर करेगा।

पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

सीजेआई ने कहा, मैंने (समीक्षा) याचिका की जांच नहीं की है। मुझे इसे (उस संविधान पीठ के न्यायाधीशों के बीच) प्रसारित करने दीजिए।

रोहतगी ने कहा कि संविधान पीठ के सभी न्यायाधीशों का विचार था कि समलैंगिक व्यक्तियों के खिलाफ कुछ प्रकार का भेदभाव है और इसलिए उन्हें भी राहत की जरूरत है।

उन्होंने कहा, शीर्ष अदालत रजिस्ट्री के अनुसार, समीक्षा याचिका 28 नवंबर को विचार के लिए सूचीबद्ध की गई थी।

नवंबर के पहले सप्ताह में, एक याचिकाकर्ता ने 17 अक्टूबर के फैसले की समीक्षा की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मंजूरी देने की मांग करने वाली 21 याचिकाओं पर चार अलग-अलग फैसले सुनाए थे।

सभी पांच न्यायाधीश विशेष विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिक विवाहों को कानूनी समर्थन देने से इनकार करने में एकमत थे और कहा कि ऐसे संबंधों को मान्य करने के लिए कानून में बदलाव करना संसद के दायरे में है।

हालाँकि, शीर्ष अदालत ने 3:2 के बहुमत से माना कि समलैंगिक जोड़ों को गोद लेने का अधिकार नहीं है।

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