राजनीतिक दलों के पंजीकरण और नियमन के नियम तय करने की मांग, SC में याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें राजनीतिक दलों को नियमों में बांधने की मांग की गई है। याचिका में चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों के पंजीकरण और नियमन के लिए नियम तय करने का आग्रह किया गया है ताकि धर्मनिरपेक्षता पारदर्शिता और लोकतंत्र को बढ़ावा मिले।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है जिसमें राजनीतिक दलों को नियम कानूनों में बांधने की मांग की गई है। दाखिल याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह राजनीतिक दलों के पंजीकरण और नियमन के लिए नियम तय करे जिससे कि धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता, लोकतंत्र और राजनीतिक न्याय को बढ़ावा मिले।
याचिका में यह भी मांग है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह राजनीति में भ्रष्टाचार, जातिवाद, क्षेत्रवाद, साम्प्रदायिकता और अपराधीकरण को कम करने के लिए कदम उठाए। याचिका वकील अश्वनी उपाध्याय ने दाखिल की है।
पड़े थे छापे
याचिका में पिछले दिनों मीडिया में आई उस खबर का भी जिक्र है दो राजनीतिक दलों के दफ्तरों में आयकर के छापे पड़े थे, उन पर कालेधन को सफेद करने का आरोप है। याचिका में कहा गया है कि बहुत से राजनीतिक दल डोनेशन में रकम लेकर कुछ प्रतिशत काट कर वापस कर देते हैं और ऐसे कालेधन को सफेद किया जाता है।
ऐसे फर्जी राजनीतिक दल न सिर्फ लोकतंत्र के लिए खतरा हैं बल्कि विभिन्न अपराध में शामिल लोगों को पैसे लेकर पार्टी पदाधिकारी बना कर देश की छवि भी खराब कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के लिए कोई नियम या रेगुलेशन नहीं है इसलिए कई अलगाववादियों ने डोनेशन कलेक्ट करने के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी बना ली है।
विधेयक लाने की जरूरत महसूस हो रही है
ये सब इसलिए हो रहा हैं क्योंकि पंजीकृत राजनीतिक दलों की फंक्शनिंग रेगुलेट करने के लिए कोई नियम कानून नहीं हैं। लंबे समय से राजनीतिक दलों के लिए एक समग्र विधेयक लाने की जरूरत महसूस हो रही है।
जस्टिस जीवन रेड्डी की अध्यक्षता वाले विधि आयोग और जस्टिस एमएन वेंकेटचलैय्या की अध्यक्षता वाले संविधान समीक्षा आयोग ने इस पर विचार किया था। संविधान समीक्षा आयोग की विशेषज्ञ समिति ने राजनीतिक दलों के (पंजीकरण और नियमन) विधेयक 2011 ड्राफ्ट किया था।
चुनाव आयोग तय करे रूल रेगुलेशन
लेकिन उसके बाद की सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कई देशों में इस संबंध में कानून हैं। कहा है कि इसमें दो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं पहला- इनर पार्टी डेमेक्रेसी की जरूरत और दूसरा राजनीतिक दलों में फंडिंग को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों का संवैधानिक दर्जा होता है।
वो सरकार का भविष्य तय करती हैं और सार्वजनिक नीतियों पर निर्णय लेती है जिनसे लाखों लोग प्रभावित होते हैं लेकिन राजनीतिक दलों को रेगुलेट करने का कोई कानून नहीं है। राजनीतिक दलों की वर्किंग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है इसलिए चुनाव आयोग को इसके लिए रूल रेगुलेशन तय करने चाहिए।
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