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    मोदी सरकार की नई रणनीति, कर्ज लेकर विदेश भागने वालों का रास्ता हुआ बंद

    By Tilak RajEdited By:
    Updated: Sat, 10 Mar 2018 11:06 PM (IST)

    पासपोर्ट विवरण नहीं होने की सूरत में बैंक अपने डिफॉल्टर्स, खास तौर पर विलफुल डिफॉल्टर्स के विदेश भाग जाने के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे।

    मोदी सरकार की नई रणनीति, कर्ज लेकर विदेश भागने वालों का रास्ता हुआ बंद

    नई दिल्ली, पीटीआइ। बैंकों को चूना लगाने वाले अब विदेश नहीं भाग सकेंगे। सरकार ने 50 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा कर्ज ले चुके या लेने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए संबंधित बैंक में पासपोर्ट विवरण जमा कराना अनिवार्य कर दिया है। नए कर्ज आवेदकों को अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ ही पासपोर्ट विवरण जमा कराना होगा, जबकि मौजूदा कर्जदारों को पासपोर्ट विवरण जमा कराने के लिए 45 दिनों की मोहलत दी गई है।

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    वित्तीय मामलों के सचिव राजीव कुमार ने शनिवार को ट्वीट कर कहा, 'स्वच्छ और जिम्मेदार बैंकिंग की दिशा में अगला कदम यह है कि 50 करोड़ और उससे ऊपर के कर्ज के लिए पासपोर्ट विवरण अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई करना है।' कुमार ने कहा कि आर्थिक अपराधियों को विदेश भागने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    गौरतलब है कि पासपोर्ट विवरण नहीं होने की सूरत में बैंक अपने डिफॉल्टर्स, खास तौर पर विलफुल डिफॉल्टर्स के विदेश भाग जाने के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, जतिन मेहता और इस तरह के कई अन्य डिफॉल्टर विभिन्न बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर विदेश भाग चुके हैं और अब वापस आने को तैयार नहीं हैं। पंजाब नेशनल बैंक को 12,700 करोड़ रुपये तक का चूना लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी ने तो देश लौटने और विभिन्न एजेंसियों के साथ सहयोग करने से साफ तौर पर मना कर दिया है।

    मोदी और चोकसी के भागने के बाद ही पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल ने फ्युजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स बिल को मंजूरी दे दी थी। बिल के तहत ऐसे भगोड़ों की जब्त की गई संपत्ति जल्द से जल्द बेच दिए जाने का प्रावधान भी है, ताकि रकम की जल्द भरपाई की जा सके। इसी की अगली कड़ी में पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय ने बैंकों को 50 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज ले चुके कर्जदारों का विवरण जुटाने और उनमें से किसी भी मामले में धोखाधड़ी का अंदेशा होने पर तुरंत वैसे मामले सीबीआइ को बताने का निर्देश दिया था।