पाकिस्तान आगे आये तो कारोबारी रिश्तों पर काम करे भारत: संसदीय समिति
आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान जिस तरह से मदद देता है उसे क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश भारत को और तेज करनी चाहिए लेकिन उसके साथ कारोबारी रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश भी नहीं छोड़नी चाहिए। सरकार की पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की नीति नेबरहुड फर्स्ट पर संसदीय समिति की नई रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही सुझाव दिए गए हैं।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान जिस तरह से मदद देता है उसे क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश भारत को और तेज करनी चाहिए, लेकिन उसके साथ कारोबारी रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश भी नहीं छोड़नी चाहिए। सरकार की पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की नीति 'नेबरहुड फर्स्ट' पर संसदीय समिति की नई रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही सुझाव दिए गए हैं।
रिपोर्ट में सार्क को लेकर की प्रशंसा
रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को भी नये सिरे से सक्रिय करने के भारत सरकार से नई कोशिश की अनुशंसा की गई है। हालांकि, यह भी कहा गया है कि अगर पाकिस्तान की तरफ से सार्क के लक्ष्यों की राह में अड़चन लगाई जा रही हैं तो उसे अलग रखते हुए इस संगठन के दूसरे सदस्य देशों के साथ मिलकर भारत को इसके आर्थिक व दूसरे उद्देश्यों के लिए काम करना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ भी भारत को दूसरे सभी देशों को एक साथ ले कर चलना चाहिए और उन देशों को अलग करना चाहिए आतंकवाद को समर्थन करते हैं।
पाकिस्तान के बारे में समिति ने क्या कहा?
पाकिस्तान के बारे में समिति ने कहा है कि इस देश से संचालित होने वाले आतंकी एक बड़ी चुनौती हैं। समिति ने माना है कि भारत की सक्रिय कूटनीति की वजह से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग हुआ है। भारत सकार को यह नीति जारी रखनी चाहिए ताकि पाकिस्तान पर अंकुश लगे। समिति आगे कहती है कि कूटनीतिक मोर्चे पर खास प्रगति नहीं होने के बावजूद उसका यह मानना है कि पाकिस्तान के साथ आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए, लेकिन यह तभी होनी चाहिए जब पाकिस्तान भी आगे आए और भारत के साथ अपनी सभ्यता के पुराने संबंधों को देखते हुए दोनों देशों की जनता के बीच द्वेष खत्म करने के लिए काम करे।
विदेश मंत्रालय की समिति ने सौंपी रिपोर्ट
यह पहली बार है कि विदेश मंत्रालय की समिति ने सरकार की एक प्रमुख कूटनीति पहल पर विस्तार से रिपोर्ट सौंपी है। सरकार इस पर कितना पालन करती है यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इससे पाकिस्तान व दूसरे देशों को लेकर भारतीय नीति निर्धारकों की एक सोच का पता चलता है। इसमें श्रीलंका के बारे में कहा गया है कि इस पड़ोसी देश को आर्थिक संकट से निकालने के लिए सरकार को हरसंभव मदद करनी चाहिए। सबसे अच्छे मित्र देश की तरफ भारत को उसकी मदद करनी चाहिए। भारतीय कंपनियों को वहां निवेश करना चाहिए। भारत को उसे सस्ते कर्ज देने चाहिए और दूसरे मंचों पर भी श्रीलंका के हितों को बढ़ावा देना चाहिए।
बांग्लादेश को लेकर दिया यह सुझाव
एक अन्य पड़ोसी देश बांग्लादेश के बारे में सरकार को यह सुझाव दिया गया है कि उसके सात तीस्ता जल बंटवारे संधि को लेकर अब ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। साथ ही बांग्लादेश के साथ समग्र आर्थिक समझौते को शीघ्र लागू करने की कोशिश करनी चाहिए।
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