नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। क्या पाकिस्तान के हुक्मरान अपने देश को एफएटीएफ की निगरानी सूची से बाहर निकालने के लिए अब हाफिद सईद, मसूद अजहर, दाऊद इब्राहिम जैसे आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे ? पाकिस्तान के अभी तक के रवैये को देखते हुए यह उम्मीद करना फिलहाल बेमानी होगी। लेकिन इतना तय है कि अगर पाकिस्तान ने इन आतंकियों पर कार्रवाई को लेकर वैश्विक बिरादरी को संतुष्ट नहीं किया तो उसके लिए एफएटीएफ की तरफ से ब्लैकलिस्टेड (प्रतिबंधित सूची में शामिल होने) का खतरा हमेशा बरकरार रहेगा।

एफएटीएफ ने दिया संकेत, पाक को करनी होगी कार्रवाई

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की तरफ से जिस तरह से आगे का रोडमैप दिखाया है, उससे साफ है कि इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में पाकिस्तान ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए दूसरे जो कदम उठाए हैं, उनके भी कोई मायने नहीं हैं। एफएटीएफ गैरकानूनी तरीके से पैसा एक जगह से दूसरी जगह भेजने या आतंकी फंडिंग को मदद करने वाले संगठनों व देशों की गतिविधियों पर नजर रखने वाला अंतर-सरकारी निकाय है। पूरी दुनिया में किसी भी अवैध काम को वित्तीय मदद पहुंचाने पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाया जाए और किस तरह से कानून बनाया जाए, इस बारे में यह संस्थानों व देशों को सलाह देता है।

पाक को ग्रे लिस्‍ट में रखते हुए कानून बनाने को कहा

वर्ष 2018 में इसने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखते हुए उसे 34 नियम व कानून बनाने को कहा था। अभी तक पाकिस्तान ने इसमें से 30 नियमों व कानूनों को लागू किया। इसकी एफएटीएफ ने तारीफ भी की है लेकिन जिन चार नियमों को पाकिस्तान ने लागू नहीं किया है, उसे आतंक के खिलाफ लड़ाई में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें एक नियम यह है कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र की तरफ से नामित आतंकियों की परिसंपत्तियों का पता करने और उसे जब्त करने को लेकर कदम उठाने होंगे और इसके बारे में एफएटीएफ को संतुष्ट करना होगा। एफएटीएफ ने कहा है कि यह एक बड़ा लंबित मुद्दा है, जिसे पाकिस्तान को करना होगा।

आंखों में धूल झोंकने की पड़ी है आदत

आतंकियों और उनके संगठनों की बात करें तो उनके खिलाफ पाकिस्तान ने सिर्फ विश्व बिरादरी की आंख में धूल झोंकने के लिए कार्रवाई की है। पाकिस्तान की आतंकी भूमिका को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा होती है तो वहां की सरकार लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे संगठनों के सरगना हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ दिखावे के लिए कार्रवाई करती है। वैश्विक चर्चा ठंडी हो जाती है तो उन्हें छोड़ दिया जाता है।

दिखावे के लिए करता है कार्रवाई

वर्ष 2016 में पठानकोट हमले के बाद मसूद अजहर को बंद किया गया था, लेकिन बाद में उसके बारे में कुछ नहीं बताया गया। हाफिज सईद को वहां की एक अदालत ने आतंकी फं¨डग मामले पर वर्ष 2019 में 10 साल की सजा सुनाई थी। लेकिन माना जाता है कि वह ज्यादातर समय अपने घर में रहता है। मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता सईद को कई बार गिरफ्तार किया गया है और हर बार छोड़ दिया जाता है।

Edited By: Ramesh Mishra