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    शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर के आदेश पर हुआ था पहलगाम हमला? सूत्र ने बताया- किन आतंकियों को सौंपी गई थी हमले की जिम्मेदारी

    Updated: Tue, 15 Jul 2025 04:01 AM (IST)

    पहलगाम आतंकी हमले की जाँच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया था। हमले की योजना पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य लीडरशिप ने बनाई थी। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे। हमले में सिर्फ विदेशी आतंकियों को शामिल किया गया था।

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    पाकिस्तान खुफिया विभाग आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर इस आतंकी हमले को अंजाम दिया था: सूत्र।(फोटो सोर्स: रॉयटर्स)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर ताजा जानकारी सामने आई है। एक सूत्र ने बताया है कि पाकिस्तान खुफिया विभाग आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर इस आतंकी हमले को अंजाम दिया था।

    इतना ही नहीं वहां की राजनीतिक और सैन्य लीडरशिप द्वारा इस हमले की प्लानिंग की गई थी। इसका मतलब साफ है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर को इस हमले की पूरी जानकारी थी। 22 अप्रैल को पाकिस्तान आतंकियों ने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी।

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    हमले के लिए सिर्फ विदेशी आतंकियों को चुना गया

    सूत्रों ने इसे 26/11 के मुंबई हमले जैसा लश्कर-आईएसआई प्रोजेक्ट बताया है। आईएसआई ने पाकिस्तान स्थित लश्कर कमांडर साजिद जट्ट को जम्मू-कश्मीर में सक्रिय केवल विदेशी आतंकवादियों को तैनात करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। आतंकी हमले की भनक किसी को न पड़े इसलिए किसी भी कश्मीरी आतंकवादी को इस प्लानिंग में शामिल नहीं किया गया था।

    सुलेमान की लीडरशिप में इस हमले को अंजाम दिया गया था। जानकारी के मुताबिक, सुलेमान पाकिस्तानी विशेष बल का कमांडो है। उसने पाकिस्तान के पंजाब में लश्कर के मुरीदके केंद्र में ट्रेनिंग ली थी।

    हमले से पहले सुलेमान ने बैसरन घाटी का किया था दौरा

    सैटेलाइट फोन के जरिए जानकारी मिलती है कि 15 अप्रैल को सुलेमान का ठिकाना त्राल के जंगल में था। अंदाजा लगाया जा रहा है कि हमले से ठीक एक हफ्ते पहले बैसरन के आसपास वो वहां पर आया था। अप्रैल 2023 में पुंछ में सेना के एक ट्रक पर हुए हमले का वो मास्टरमाइंड था। इसके बाद अगले दो साल तक वो छिपा रहा।

    बता दें कि सूत्रों ने दो अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान उजागर नहीं की। जम्मू-कश्मीर पुलिस को पाकिस्तानी आतंकवादी हाशिम मूसा और अली भाई की भूमिका पर संदेह था, लेकिन अब तक की जांच में केवल सुलेमान की भूमिका की ही पुष्टि हुई है।

    स्थानीय आतंकवादी आदिल हुसैन थोकर की मददगार के रूप में भूमिका की भी कोई पुष्टि नहीं हुई है।सूत्रों ने यह भी बताया है कि घाटी में इस समय लगभग 68 विदेशी आतंकवादी और तीन स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं। 

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