जागरण संवाददाता, बलिया। मजदूर दिवस पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बलिया से दस महिलाओं को कनेक्शन देकर तीन साल में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले पांच करोड़ परिवारों के लिए मुफ्त एलपीजी सिलेंडर प्रदान करने वाली उज्ज्वला योजना का आगाज किया। 21वीं सदी का मंत्र देते हुए कहा कि विश्व के मजदूरों आओ, हम दुनिया को एक करें, दुनिया को जोड़ दें। दुनिया को जोड़ने का सबसे प्रभावी सीमेंट है मजदूरों का पसीना। इस दौरान उन्होंने खुद को 'श्रमिक नंबर -एक ' बताया। करीब 49 मिनट के संबोधन में उन्होंने जहां अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और उत्तर प्रदेश की बदहाली पर पूर्व प्रधानमंत्रियों को निशाने पर लिया, वहीं भोजपुरी में 'महर्षि भृगु की धरती पर सभै के परनाम, हाथ जोड़ के दिल से सभै के परनाम..' बोलकर भावनात्मक संवाद भी स्थापित किया। कहा कि हमने श्रम कानून में परिवर्तन किए। न्यूनतम 1000 रुपये मासिक पेंशन की व्यवस्था की। श्रम सुविधा पोर्टल चालू किया। तय किया कि मजदूर जहां जाएंगे उनका पीएफ वहीं स्थानांतरित होगा। बोनस के लिए अधिकतम पगार 21000 रुपये व बोनस की राशि भी न्यूनतम सात हजार तय की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कई प्रधानमंत्री दिए, मगर गरीबी बढ़ती गई। गाजीपुर के सांसद विश्र्वनाथ सिंह गहमरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने संसद में रोकर गरीबों की दुर्दशा बताई थी। तब पटेल कमीशन बना था। आयोग ने जो सुझाव दिए, वे ठंडे बस्ते में चले गए। हमने 1000 दिनों में 18000 गांवों में बिजली पहुंचाने का संकल्प लिया है। उत्तर प्रदेश के 1529 गांवों में से 1326 में बिजली पहुंचाई गई है। उन्होंने गंगा सफाई के लिए लोगों से आगे आने का आह्वान किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को नमन करते हुए महान क्रांतिकारी मंगल पांडे व चित्तू पांडे का भी स्मरण किया।

पहले वर्ष में 1.5 करोड़ कनेक्शन

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम गरीबी से लड़ रहे हैं। उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों की महिला सदस्य के नाम पर मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया जाएगा। तीन साल में पांच करोड़ कनेक्शन देने की योजना है। पहले वर्ष में 1.5 करोड़ कनेक्शन दिए जाएंगे।

बैलट बॉक्स को ध्यान में रखकर बनती रहीं नीतियां

मोदी ने कहा कि 'पहले बहुत सारे वादे हुए और नीतियां बनीं। लेकिन वे योजनाएं गरीबों के हितों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई, बल्कि फोकस बैलट बॉक्स (चुनाव) पर रहा।

इसलिए बलिया से हुई शुरुआत

आठ हजार करोड़ रुपये की इतनी बड़ी योजना को पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया से शुरू करने को लेकर हो रही चर्चाओं पर कहा कि हम चुनाव का बिगुल बजाने नहीं आए हैं। बलिया में रसोई गैस कनेक्शन का औसत बेहद कम है। यहां गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले 100 में से आठ परिवारों के पास ही रसोई गैस है।

गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़नी है

कहा कि बलिया इसलिए आया हूं, क्योंकि हमें गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। पूर्वी ¨हदुस्तान अगर पश्चिमी की बराबरी कर ले तो इस देश में गरीबी का नामोनिशान नहीं रहेगा। इन इलाकों में अगर विकास पहुंच जाए तो गरीबी से लड़ने में हम सफल हो जाएंगे।

अमीरों से लिया गरीबों को दिया 'गिव इट अप' अभियान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च 2015 को 'गिव इट अप' नाम से अभियान शुरू किया। उन्होंने संपन्न लोगों से अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ने का अनुरोध किया।

1 करोड़ : 21 अप्रैल 2016 तक अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ने वाले लोग

राज्यवार सब्सिडी छोड़ने वाले लोग

-महाराष्ट्र-16.42 लाख

-उत्तरप्रदेश-12.53 लाख

-दिल्ली-7.27 लाख

-कर्नाटक-6.97 लाख

-तमिलनाडु- 6.47 लाख

ऐसे करें 'गिव इट अप'

-डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.मायएलपीजी.इन पर लॉग इन करें

-अपनी गैस कंपनी का चयन करें

-यदि रजिस्टर्ड नहीं हैं तो साइट पर रजिस्टर करें

-ऑप्ट आउट का विकल्प चुनें और पोर्टल पर लॉग इन करें ।

Posted By: Bhupendra Singh