अवधेश चौहान, कठुआ (जम्मू ) । जम्मू संभाग के कठुआ के गांव रसाना में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में चालान पेश करने के बाद सोमवार को जिला न्यायालय में पहली सुनवाई होगी। सीजेएम कोर्ट द्वारा मामले की अगली सुनवाई के लिए इसे जिला प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत में भेजा जाएगा। आरोपितों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने कई अहम सुबूत जुटाए हैं। मुख्य आरोपित सांझी राम ने बेटे को बचाने के मकसद से अहम सुबूत मिटाने के लिए लिए मेरठ विश्वविद्यालय प्रबंधन को तो मैनेज किया ही, हीरानगर पुलिस स्टेशन में तैनात कुछ पुलिस कर्मियों को भी विश्वास में लिया। इनमें हेड कांस्टेबल तिलक राज, विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) दीपक खजूरिया, एसपीओ सुरेद्र कुमार शामिल थे। क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में कहा है कि जब लड़की का शव 17 जनवरी को हीरानगर पुलिस स्टेशन लाया गया तो उसके कपड़े कीचड़ से सने हुए थे। कपड़ों पर खून के निशान भी थे। इस बात की तस्दीक मौका-ए-वारदात से लिए गए फोटोग्राफ से भी होती है।

ऐसे नष्ट किए गए सुबूत

नाबालिग के कपड़ो पर कीचड़ और खून के धब्बों से हत्या और दुष्कर्म का भंडाफोड़ न हो, इसलिए उन्हें जम्मू फोरेंसिक लैब और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने से पहले थाने में धोया गया। बाद में यह कपड़े शव को पहनाए गए। हीरानगर थाने में तैनात हेड कांस्टेबल तिलक राज को नाबालिग के कपड़ों को धोते विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) दीपक खजूरिया ने देखा और क्राइम ब्रांच के सामने कुबूला भी। चूंकि कपड़े धो दिए गए थे इसलिए जम्मू फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को कपड़ों पर कीचड़ और खून नहीं मिला। एफएसएल ने पहली फरवरी की अपनी रिपोर्ट में यही कहा है। अगर कपड़ो पर लगे कीचड़ की जांच होती तो यह पता लगाया जा सकता था कि यह मिट्टी किस इलाके की है।

डीएनए जांच से मिले अहम सुबूत

लड़की से सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि के लिए नाबालिग का वेजेनाइल स्वैब और देवस्थान से मिले बालों को दिल्ली की एफएसएल भेजा गया और दोनों के डीएनए टेस्ट को क्रॉस मैच कराया गया तो पता चला कि बाल दुष्कर्म और हत्या की शिकार नाबालिग के ही हैं। डीएनए प्रोफाइल से क्राइम ब्रांच को दुष्कर्म के साक्ष्य भी मिले हैं।

आरोपित दुष्कर्म करता रहा, परीक्षा कोई और देता रहा

मुख्य आरोपित सांझी राम ने बेटे विशाल को दुष्कर्म और हत्या में फंसते देख मेरठ में चौधरी चरण ¨सह विश्वविद्यालय प्रबंधन को भी मैनेज कर लिया। बेटा कठुआ के रसाना में मासूम की आबरू लूटता रहा और उसके बदले मेरठ में बीएससी एग्रीकल्चर की परीक्षा दूसरा युवक दे रहा था। विशाल अपना मोबाइल मेरठ छोड़ आया था, ताकि कॉल डिटेल में उसकी लोकेशन मेरठ में दिखे। मेरठ में मोबाइल पर फोन भी रिसीव किए गए ताकि जांच को गुमराह किया जा सके। आरोपित विशाल ने अपना एटीएम कार्ड भी मेरठ में ही रखा था और उस कार्ड से किसी ने पैसे भी निकाले ताकि इसे साक्ष्य बनाया जा सके।

दूसरे आरोपित शुभम (सांझी राम का भतीजा) को बचाने के लिए उसके स्कूल रिकॉर्ड में उसकी उम्र भी कम लिखाई गई। लेकिन, जम्मू राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा गठित डॉक्टरों के बोर्ड की जांच से पता चला कि वह नाबालिग नहीं है। शुभम ने लड़की की आबरू लूटने से पहले उसे नशे की गोलियां खिलाईं और फिर उसे देवस्थान में लाया। शुभम दसवीं का छात्र है, लेकिन उसकी खराब आदतों के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया था।

ऐसे की गई हत्या

सांझी राम ने अपने भतीजे शुभम और बेटे विशाल को फंसते देख पुलिस को रिश्वत खिलानी शुरू कर दी।

-एसपीओ दीपक खजूरिया, हेड कांस्टेबल तिलक राज और एसपीओ सुरेंद्र कुमार को विश्वास में लिया। रसाना के रहने वाले दीपक और सुरेंद्र ने भी आबरू लूटी।

-लड़की से छुटकारा पाने के लिए उसकी मौत की कहानी 17 जनवरी को लिखी गई।

-बेहोशी के आलम में देवस्थान के साथ पुलिया के नीचे लाया गया जहां उसे उलटा लिटाकर उसकी पीठ पर लात रखकर उसके दुपट्टे से गला घोंट दिया।

-फिर भी उसके ¨जदा होने का शक हुआ तो उसके सिर पर पत्थर मारा ताकि बचे-खुचे प्राण भी निकल जाएं। बाद में शव साथ लगती झाडि़यों में फेंक दिया।

अपहरण के बाद बदलते रहे ठिकाने

दस जनवरी को रसाना से नाबालिग के अपहरण के बाद आरोपितों ने उसे पहले देवस्थान के साथ लगते जंगलों में रखा, फिर सांझी राम के घर से लगते मवेशी बाड़े में, फिर देवस्थान में भी रखा। बच्ची के चाचा ने बताया कि आरोपित शुभम को पीडि़ता की चचेरी बहनों ने 10 जनवरी को करीब चार बजे रसाना गांव में देखा था। पीडि़ता उस समय अपने जानवर लेने सांझी राम के घर के सामने से गुजरी थी।

Posted By: Sachin Bajpai

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