नई दिल्ली, प्रेट्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे महत्वकांक्षी परियोजना और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (gaganyaan mission) में किसी महिला अंतरिक्ष यात्री के होने की संभावना नहीं है। दरअसल, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभावित अंतरिक्ष यात्रियों की खोज सशस्त्र बलों के टेस्ट पायलट में से कर रहा है और इनमें से कोई भी महिला नहीं है। नए विमानों का परीक्षण करने वाले अति दक्ष पायलट को टेस्ट पायलट कहा जाता है।

आम नागरिक हो सकते हैं मिशन का हिस्सा 
अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिलहाल इस मिशन में महिला के शामिल होने की संभावना नहीं दिखती। हालांकि महिलाओं के अलावा अन्य आम नागरिक भविष्य के मानव मिशन का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसरो ने पहले मानव मिशन के लिए संभावित उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले महीने तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। चुने गए उम्मीदवारों को नवंबर में प्रशिक्षण के लिए रूस भेजा जाएगा।

रूस और फ्रांस से हुआ है करार
पहले गगनयान मिशन को 2022 में तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भेजने की योजना है। इन यात्रियों का चयन सशस्त्र बलों के टेस्ट पायलटों में से किया जाएगा। अधिकारी ने बताया, ‘विभिन्न देशों की ओर से पहले भेजे मानव मिशन में भी टेस्ट पायलट को ही भेजा गया। इसलिए हम भी अपने मिशन में इस परिपाटी पर कायम रहना चाहते हैं। हम सशस्त्र बलों के टेस्ट पायलट को देख रहे हैं लेकिन उनमें कोई महिला टेस्ट पायलट नहीं है। भारत ने गगनयान मिशन में सहयोग के लिए रूस और फ्रांस से करार किया है।

मानव रहित विमान भेजे जाएंगे
गगनयान परियोजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है। इनमें प्रौद्योगिकी विकास, यान के निर्माण और जरूरी आधारभूत ढांचे का विकास शामिल है। गगनयान के तहत दो मानव रहित और एक मानव मिशन को अंजाम दिया जाएगा।

गौरतलब है कि गगनयान मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए एक भाषण में की थी। वायुसेना के पायलट राकेश शर्मा पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री थे। उन्होंने 2 अप्रैल 1984 को प्रक्षेपित सोवियत संघ के यान सोयुज टी-11 के जरिये अंतरिक्ष यात्र की थी।

रूस करेगा भारत की मदद 
गगनयान (Gaganyaan mission) के लिए चयनित होने वाले 12 संभावित भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों में से चार को रूस अपने यहां ट्रेनिंग देगा। इन सभी अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने का काम नवंबर से शुरू होगा और 15 महीने तक चलेगा। 

क्या है गगनयान मिशन
10 हजार करोड़ की महत्वकांक्षी गगनयान परियोजना के तहत तीन सदस्यीय दल को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी (इसरो) पिछले एक दशक से अपने मानव अंतरिक्ष मिशन पर काम कर रहा था। तीन दशकों की कोशिशों के बाद इसरो ने दिसंबर 2014 में GSLV MK-III का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था जिसे अब LVM-3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) के नाम से जाना जाता है। पिछले साल जून में इसरो ने LVM-3 को लॉन्च किया जो अपने साथ GSAT-19 लेकर अंतरिक्ष गया था। LVM-3 ही वो यान है जो मानव को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। इससे इसरो को क्रायोजेनिक तकनीक को और मजबूत करने में मदद मिलेगी जिससे अंतरिक्ष में और भारी पेलोड्स भेजे जा सकेंगे।

Posted By: Ayushi Tyagi

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