इंदौर [नईदुनिया]। सुबह सात से बारह बजे तक स्कूल में पढ़ाई... दोपहर एक से रात साढ़े नौ बजे तक गारमेंट की दुकान पर सेल्सगर्ल का काम... रात 11 से दो बजे तक होमवर्क। पढ़ाई के साथ परिवार में आर्थिक संघर्षों का दबाव। इन सबके बीच अपने और परिवार के लिए छोटा सा सपना देखा जिसे मेहनत, ईमानदारी और समर्पण से पूरा कर दिखाया डिंपल कुमावत ने। प्रदेश की 12वीं बोर्ड परीक्षा की मेरिट लिस्ट में टॉप टेन में आई पिंक फ्लॉवर स्कूल की डिंपल ने मातृ दिवस पर अपनी दृष्टिबाधित मां और दर्जी पिता को जीवन का खास तोहफा दिया।

माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम सोमवार को घोषित होंगे। इसके दो दिन पहले ही मेरिट में स्थान बनाने वाले विद्यार्थियों के पास मुख्यमंत्री निवास से फोन आने लगे। शहर में 12वीं के आठ व 12वीं के तीन विद्यार्थियों के पास फोन पहुंचे। वे रविवार को अपने अभिभावक और शिक्षकों के साथ भोपाल रवाना हुए।

सोमवार को विशेष समारोह में मुख्यमंत्री इन्हें सम्मानित करेंगे। जनता क्वार्टर में रहने वाली डिंपल कुमावत के पास सीएम हाउस से फोन आया तब वह परदेशीपुरा स्थित कपड़े की दुकान पर थी। वह दो साल से घर खर्च और पढ़ाई के पैसे जुटाने के लिए नौकरी कर रही है। डिंपल ने बताया उसे मेरिट की उम्मीद थी, लेकिन प्रदेश की प्रावीण्य सूची में आने की कल्पना नहीं की थी। बिना कोचिंग यह मुकाम पाने वाली डिंपल कलेक्टर बनना चाहती है।

डिंपल ने बताया इस बार आर्थिक परेशानी के कारण अंत तक स्कूल की फीस नहीं भर सकी थी तो लग रहा था कि परीक्षा में शामिल हो पाऊंगी या नहीं? लेकिन स्कूल प्रबंधन ने कड़ी मेहनत और इच्छाशक्ति देख रोल नंबर जारी कर दिया। मैंने शिक्षकों का विश्वास नहीं टूटने दिया। दृष्टिबाधित मां हरिइच्छा कुमावत कहती हैं मातृत्व दिवस पर इससे बड़ा कोई तोहफा नहीं हो सकता।

भावनात्मक संबल दे पाती हूं

डिंपल की मां ने बताया आंखों की समस्या के कारण डिंपल को घर के कामों में भी हाथ बंटाना पड़ता है। रात के 12 बजे हो या सुबह के चार, कभी भी नींद खुलती है तो डिंपल पढ़ती मिलती है। मैं पढ़ाई में तो उसकी कोई मदद नहीं कर पाती, सिर्फ भावनात्मक संबल दे पाती हूं ताकि वह कभी निराश न हो।

पिता ने पढ़ाई के लिए बाइक बेच दी

सराफा कन्या स्कूल में पढ़ने वाली दर्शिता सोनी भी संघर्षों के बाद इस मुकाम पर पहुंची। कॉमर्स विद मेथ्स में प्रदेश में मेरिट में आने वाली दर्शिता कहती है पहले तो सीएम हाउस से फोन आने की बात पर यकीन ही नहीं हुआ लेकिन पापा ने कहा हम सभी को भोपाल चलना है। मरीमाता निवासी दर्शिता के पिता सराफा स्थित दुकान पर काम करते हैं और मां फॉल पिको करती हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी बाइक बेच दी ताकि बेटी का सीए बनने का सपना पूरा हो सके।

बेटी ने पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया

वैष्णव कन्या स्कूल में दसवीं में पढ़ने वाली श्रेया पांडे ने बताया विश्वास ही नहीं हो रहा है कि प्रदेश की मेरिट में स्थान बना है। परीक्षा के लिए मेहनत तो बहुत की थी। 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक आने का विश्वास था। सीएम हाउस जाने का बहुत उत्साह है। पिता सुशील पांडे प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। वे कहते हैं बेटी ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

85 फीसदी से ज्यादा अंक वाले विद्यार्थियों की उच्चशिक्षा होगी मुफ्त

इस वर्ष अच्छे अंक लाने वाले सभी मेधावी विद्यार्थियों की आगामी पढ़ाई निशुल्क होगी। पहली बार लागू हुई मेधावी छात्र योजना के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को 75 प्रतिशत व सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को 85 प्रतिशत अंक लाने पर शासन द्वारा लैपटॉप देने के साथ उच्च शिक्षा का पूरा खर्च उठाया जाएगा। मेधावी विद्यार्थी बारहवीं के बाद किसी भी विषय में स्नातक करें, इंजीनियरिंग, मेडिकल या प्रबंधन की पढ़ाई करे, खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा। सरकारी व प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal