वक्फ संशोधन विधेयक पर NDA सहयोगियों का जोरदार समर्थन, JDU के सेक्युलर पार्टी होने पर क्या बोले ललन सिंह?
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा के साथ उसके सहयोगी दलों जदयू टीडीपी लोजपा रालोद और हम ने भी विधेयक का समर्थन किया और विपक्ष पर गरीब मुस्लिमों के खिलाफ राजनीति करने का आरोप लगाया। जदयू के ललन सिंह ने विपक्ष की धर्मनिरपेक्षता को ‘वोटबैंक राजनीति’ बताया जबकि शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट के विरोध को शर्मनाक कहा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक पर लोकसभा के चर्चा के दौरान भाजपा ही नहीं, उसके सहयोगी दल भी विपक्ष पर हमलावर रहे। NDA के सहयोगी दलों जदयू, टीडीपी, लोजपा, रालोद, हम ने खुलकर न सिर्फ विधेयक का खुलकर समर्थन किया, बल्कि विपक्ष को ही गरीब मुसलमानों, मुस्लिम विधवाओं और मुस्लिम बच्चों के खिलाफ करार दिया।
जदयू के ललन सिंह ने विपक्ष के भाजपा के मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों खारिज करते हुए कहा कि भाजपा के समर्थन से पिछले 20 सालों में नीतीश कुमार सरकार ने मुसलमानों के विकास के लिए अहम काम किया।
ललन सिंह ने पंथनिरपेक्ष पार्टी पर क्या कहा?
जदयू के पंथनिरपेक्ष पार्टी होने का हवाला देते हुए विधेयक के समर्थन पर संशय खड़ा करने वालों को करारा जवाब देते हुए ललन सिंह ने कहा कि जदयू को किसी से पंथनिरपेक्षता का सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की पंथनिरपेक्षता समाज को बांटकर वोटबैंक की राजनीति करने की है, वहीं नीतीश कुमार समाज में सबको लेकर काम करते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जाति जनगणना की बात करने वाले लोग मुस्लिम समाज में पसमंदा की स्थिति पर चुप्पी साध लेते हैं।
ललन सिंह ने कहा कि आने वाले समय में पसमंदा समाज के मुसलमान प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े होंगे, क्योंकि इस विधेयक के बाद वक्फ की संपत्तियों का इस्तेमाल उनके लिए हो सकेगा। ललन सिंह ने कलेक्टर की भूमिका पर विपक्ष के तर्कों का खारिज करते हुए कहा कि जिला कलेक्टर राजस्व के दस्तावेजों का संरक्षक होता और किसी भी जमीन के मालिकाना हक के निर्धारण में उसकी अहम भूमिका होती है। वहीं शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के विधेयक के विरोध को शर्मनाक बताया।
उद्धव ठाकरे गुट पर श्रीकांत शिंदे के आरोप
शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट पर बाला साहब ठाकरे की विचारधारा के साथ छल करने का आरोप लगाते हुए शिंदे ने कहा कि यदि बाला साहब ठाकरे जिन्दा होते तो वक्फ विधेयक व औरंगजेब पर पार्टी के रूख को लेकर सबसे ज्यादा दुखी होते। वहीं लोजपा के अरुण भारती ने विधेयक को किसी भी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं होने का दावा करते हुए कि यह सिर्फ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए है।
उन्होंने साफ किया कि धर्म की आड़ में कोई भी संस्था कानून से ऊपर नहीं हो सकती है। वहीं विधेयक का समर्थन करते हुए टीडीपी ने नए वक्फ कानून के तहत बनने वाले नियमों में लचीला रूख अख्तियार करने का सुझाव दिया। टीडीपी के सांसद कृष्णा प्रसाद टेन्नेटी ने कहा कि इन नियमों में वक्फ बोर्डों के गठन में राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित किया जाना।
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