नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग टॉवर लगाने जैसे विकल्पों को अजमाने की तैयारियां भले ही जोरों पर है, लेकिन हवा की गुणवत्ता पर काम करने वाले अमेरिकी विशेषज्ञ प्रकाश दोराईस्वामी इसे प्रभावी नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि ना तो यह वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान है और ना ही इससे यह खत्म होने वाला है। ऐसे में जरूरी है कि इसके पैदा होने वाले स्त्रोतों को खत्म किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे लगाने पर जो करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, उसकी जगह किसानों को तकनीकी मदद मुहैया कराने में मदद दी जानी चाहिए, ताकि वह फसलों के अवशेष को न जलाएं। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी मजबूत बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए, जिससे लोग निजी वाहनों के इस्तेमाल से बचें।

प्रदूषण कम करने को लेकर जमीनी स्‍तर पर काम करना होगा

वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत स्तर पर काम करने वाली अमेरिका की प्रतिष्ठित एजेंसी आरटीआइ इंटरनेशनल के प्रमुख वैज्ञानिक (वायु गुणवत्ता) दोराईस्वामी गुरुवार को दिल्ली में थे। 'जागरण' से विशेष बातचीत में दोराईस्वामी ने बताया कि वायु प्रदूषण को लेकर उन्होंने हाल में दिल्ली, चंडीगढ़ सहित देश के कई शहरों में कार्यशालाएं आयोजित की थीं, जिसमें सरकारी एजेंसियों के साथ स्थानीय प्रशासन, तकनीकी संस्थान और प्रदूषण को लेकर काम करने वाली अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल थे।

इस दौरान प्रदूषण के जो तीन बड़े कारण सामने आए, उनमें पहला- निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल, दूसरा- फसलों के अवशेष को जलाया जाना और तीसरा- वाहनों से होने वाला प्रदूषण है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के स्तर में सही मायनों में कमी लाना है तो इन्हीं तीन मुख्य बिंदुओं को लेकर जमीनी स्तर पर काम करना होगा। उन्होंने इसे लेकर कुछ उपाय भी बताए हैं। साथ ही कहा कि वह इससे जुड़े सभी सुझाव भारत और अमेरिका की सरकारों को भी सौंपेंगे। साथ ही उम्मीद जताई कि इससे जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट जनवरी के अंत तक दे देंगे।

प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को खत्म किया जाए

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत सरकार इसे लेकर अपने स्तर पर सभी प्रभावी कदम उठा रही है। उनके पास इससे निपटने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम है। लेकिन इसमें सफलता तभी मिलेगी, जब जमीनी स्तर पर काम होगा। फिलहाल अभी इसमें कमी है। स्मॉग टॉवर को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह ठीक एयर प्यूरीफायर जैसा ही है जो बंद कमरे की हवा को साफ रखने में मदद करता है। लेकिन यह तभी तक ठीक से काम करता है, जब तक घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद हैं। यदि दरवाजे और खिड़कियां खुली रहेंगी, तो इसका कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। ऐसे में जरूरी है कि प्रदूषण फैलाने वाले स्त्रोतों को खत्म किया जाए, ताकि प्रदूषण पैदा ही न हो।

गौरतलब है कि यह एजेंसी मौजूदा समय में भारत में नॉर्थ अमेरिकन सेंटर के साथ मिलकर वायु प्रदूषण से निपटने में सरकार को नीतिगत मदद दे रही है। इससे पहले वर्ष 2016-17 में भी इस एजेंसी ने भारत में वायु प्रदूषण को लेकर अपनी एक रिपोर्ट दी थी। बाद में उसके कई सुझावों को सरकार ने अपने प्लान में दी जगह दी थी।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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