नई दिल्ली [राहुल मानव]। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (Indian Institute of Technology Delhi) के 50वें दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे Chandrayaan 2 के हीरो और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) के अध्यक्ष डॉ. के सिवन ने अपनी जिंदगी से जुड़े कई किस्से छात्रों से साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने हमेशा जो सोचा वो नहीं मिला, लेकिन यह भी कई बार अच्छा ही होता है। उन्होंने कहा कि अपने क्रेजी विचारों को कम मत आंके, उन्हें खुद से दूर ना करें। दुनिया के अधिकांश इनोवेशन (नवाचार) जहां से आए वहां क्रेजी विचार ही थे। अध्य्यन करते रहें। बता दें कि पीएम मोदी भी इसरो चीफ डॉ. के सिवन के मुरीद हैं।

शिक्षा एक आजीवन प्रयास है

उन्होंने कहा कि दक्षिण से आते हुए भी दिल्ली मुझे लुभाने में कभी नाकाम नहीं रही। इस शहर के दिग्गजों की सूची में विरासत, स्मारक, शक्तिशाली पद, स्वतंत्रता आंदोलन एवं नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अभिजीत बनर्जी (जेएनयू के पूर्व छात्र) शामिल हैं। यह सब विभिन्न संस्कृतियों एवं सभ्यताओं के एक बड़े मेलजोल की तरह है जो स्वागत के साथ साथ प्रेणादायक भी है। उन्होंने कहा कि आइआइटी बॉम्बे के पूर्व छात्र के रूप में और अपने निजी अनुभवों से कह सकता हूं कि भारत में आइआइटी तकनीकी शिक्षा का पवित्र केंद्र है और मुझे यकीन है आज डिग्री ले रहे सभी छात्र आइआइटी दिल्ली की गौरवशाली प्रतिभा को बनाए रखेंगे। साथ ही कहा कि शिक्षा एक आजीवन प्रयास है। 

अपनी खुशी के लिए चुनें करियर

अपने संबोधन में के सिवन बोल- 'मैं छात्रों से ये ही कहूंगा कि अपनी नौकरी को पैसे के लिए मत चुनें बल्कि अपनी खुशी के लिए चुनें। आपको अपने दृष्टिकोण में व्यावहारिक बनना होगा। पुरानी पीढ़ी के अनुभवों से सीख लेनी होगी। जब मैंने स्नातक किया था तब जॉब सिनेरियो (नौकरी परिदृश्य) में आज की तरह इतने अवसर नहीं थे। ध्यान रखें कि जीवन सिर्फ एक है औए करियर के विकल्प अनेक हैं।

छात्रों को अपने जुनून और प्राकृतिक प्रतिभा को पहचानने और करीरयर को एक सीध में रखने की आवश्यकता है। एक ऐसा उद्योग चुने जो आपके जुनून व रुचियों को दर्शाता हो। छात्र जो भी करें उसमें अच्छे रहें। भगवान कि खातिर कभी भी नकलची मत बनना। सिर्फ इसीलिए कि एक स्टैंड अप कॉमेडियन बनना फैशनेबल है क्या आप कॉमेडियन बन सकते हैं? आपको क्या अच्छा लगता है या आप में क्या अच्छा है , कॉमेडी वे बीच में अपना संतुलन बनाए रखना ही ट्रिक है। तेजी से बदलती इस दुनिया में , आकांक्षाओं की कोई सीमा नहीं है। सही चीजों पर ध्यान केंद्रित करना सफलता की कुंजी है।

विफलताओं से मिलती है सीख

डॉ के सिवन से छात्रों को बताया कि कैसे विफलताओं से भी सीख मिलती है।जो जरूरी भी है।जब मैंने इसरो में पीएसएलवी परियोजना पर अपना करियर शुरू किया तो एएसएलवी प्रगति पर था। एएसएलवी एक जटिल पांच चरण का ठोस ईंधन प्रक्षेपण लांच वाहन और इसके चार मिशन में से दो मिशन विफल हुए थे। एक आंशिक रूप से सफल रहा। इन परिस्थितियों में पीएसएलवी का विकास प्रगति पर था। पीएसएलडी वन मिशन भी विफल हो गया था। इन शुरुआती विफलताओं के बाद भी इसरो समुदाय में सफल होने की आपार इच्छा थी। इसरो एल्बर्ट आइन्स्टीन के कथन में विश्वास करता है ....जिसने कभी गलती नहीं कि है उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं कि है।

चांद पर नरम लैंडिंग का प्रदर्शन करेगा

डॉ. के सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 के प्रौद्योगिकी के हिस्से में हम चांद पर नरम लैंडिंग प्राप्त नहीं कर सके, लेकिन चंद्रमा की सतह से 300 मीटर तक सभी सिस्टम ने कार्य किया। चीजों को सही सेट करने के लिए बहुत मूल्यवान डेटा उपलब्ध है। साथ ही कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि इसरो अपने सभी अनुभवों, ज्ञान और तकनीकी कौशल को सही तरीके से स्थापित करके आने वाले समय में चांद पर नरम लैंडिंग का प्रदर्शन करेगा। चन्द्रयान 2 कहानी का अंत नहीं है। आदित्य एल1 सौर मिशन, मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम पर हमारी योजनाएं ट्रेक पर हैं। आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में विभिन्न उपग्रह प्रक्षेपित किए जाएंगे। एसएसएलवी कभी भी दिसंबर , जनवरी में कभी भी अपनी उड़ान भर सकता है।

अगले साल एमएसी इकनॉमिक्स समेत कई पाठ्यक्रम किए जाएंगे शुरू

समरोह में आइआइटी दिल्ली के निदेशक प्रो वी रामगोपाल राव ने कहा कि अगले वर्ष संस्थान की तरफ से कई पाठ्यक्रम को शुरू करने की योजना है। इसमें कई स्नातक की डिग्री के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। मेटीरियल इंजीनियरिंग में बीटेक प्रोग्राम , बैचलर ऑफ डिज़ाइन, एमएससी इकनॉमिक्स पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। समरोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को स्वर्ण पदक से भी नवाजा गया। कुल 2 हजार छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। साथ ही संस्थान ने अपने कई पूर्व छात्रों को प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी नवाजा।

कैरक्टर बिल्डिंग पर आइआइटी दिल्ली शुरू करे पाठ्यक्रम दूंगा 100 करोड़ रुपये

आइआइटी दिल्ली के 60 के दशक से स्नातक की डिग्री करने वाले पूर्व छात्र और बिजनेसमेन अमरजीत सिंह बख्शी , जिन्हें समारोह में प्रतिष्ठित एलुमिनी सर्विस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इंसान का व्यक्तित्व बहुत मान्य रखता है। इसमें लोग पीछे हो रहे हैं। मैं आइआइटी दिल्ली को 10 करोड़ रुपये एंडोमेंट फंड के रूप के तहत अपने योगदान की पेशकश की है। अगर आइआइटी दिल्ली अपने छात्रों के।लिए कैरेक्टर बिल्डिंग के पाठ्यक्रम को शुरू करता है तो मैं संस्थान को 100 करोड़ रुपये देने की पेशकश करता हूं।

डाक टिकट हुआ जारी

आइआइटी दिल्ली ने 50वें दीक्षा समारोह के अवसर पर डाक टिकट और डाक पत्र जारी किया है। इसके डिज़ाइन और लोगो को संस्थान के छात्रों ने तौयार है। इसे तैयार करने में एक महीने का समय लगा है। इसमें 50 अक्षर के ऊपर संस्थान की पहचान माने जाने वाले डोगरा हाल की हट के लुक को दर्शाया गया है। इस हाल को करीब 50 साल पहले डिज़ाइन किया गया था। संस्थान के बड़े और प्रतिष्ठित कार्यक्रम इसी में ही आयोजित होते हैं। इसके ऊपर एक पक्षी की तस्वीर को भी दर्शाया गया है।

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Posted By: JP Yadav

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