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    डॉक्टर को लगी इंजेक्शन लेने की दुर्लभ लत, फिर ऐसे छुड़ाई गई यह आदत

    By Edited By:
    Updated: Wed, 23 May 2018 01:57 PM (IST)

    एम्स के मनोचिकित्सकों को बताया कि उन्हें अधिक सिगरेट पीने की भी आदत है और प्रतिदिन 10-20 सिगरेट पी जाते थे।

    डॉक्टर को लगी इंजेक्शन लेने की दुर्लभ लत, फिर ऐसे छुड़ाई गई यह आदत

    नई दिल्ली (रणविजय सिंह)। नशे के आदी लोग ओपियोइड दवाओं का गलत इस्तेमाल करते रहे हैं, पर यह जानकर हैरानी होगी कि सर्जरी के एक डॉक्टर ने अपने कमर दर्द से राहत के लिए बुटरफेनाल नामक एनेस्थेटिक ओपियोइड दवा का इस्तेमाल शुरू किया। डॉक्टर ने इसका इस्तेमाल यह सोचकर शुरू किया कि यह दवा स्टेरॉयड रहित है। जाहिर है इसलिए सेहत पर उसका दुष्प्रभाव नहीं होगा, लेकिन इसमें मॉर्फिन की मात्रा अधिक रहती है। धीरे-धीरे उन्हें इसकी लत लग गई। पत्नी व बच्चों का साथ छूट गया और जमी जमाई प्रैक्टिस प्रभावित हो गई।

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    एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने उनकी लत छुड़ाई। एम्स के डॉक्टरों ने बुटरफेनाल दवा का नशे के लिए इस्तेमाल का दुर्लभ मामला बताते हुए एशियन जर्नल ऑफ साइकेट्री में रिपोर्ट की है। पीड़ित डॉक्टर को मरीजों की सर्जरी के दौरान लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता था। इस कारण उन्हें कमर दर्द की परेशानी होने लगी। वह सात वर्ष से इस बीमारी से पीड़ित थे।

    जानकारी के मुताबिक, शुरुआती दौर में वह दर्द से छुटकारा के लिए किसी और दवा का इस्तेमाल करते थे। लेकिन, करीब छह साल बाद वह बुटरफेनॉल इंजेक्शन लेने लगे। मरीजों को सर्जरी के बाद दर्द से राहत के लिए यह इंजेक्शन लगाया जाता है। अस्पताल के फार्मेसी से यह इंजेक्शन उन्हें आसानी से मिल जाता था।

    शुरू में वह सप्ताह में एक से दो बार यह इंजेक्शन लेते थे। धीरे-धीरे ऐसी लत लगी कि वह प्रतिदिन दिन तीन से चार बार यह इंजेक्शन लेने लगे। सात महीने तक कुल्हे की मांसपेशियों में इंजेक्शन लेते रहे। एक ही जगह बार-बार इंजेक्शन लेने के कारण जख्म के निशान बनने पर उन्होंने मांसपेशियों में इंजेक्शन लेना बंद कर दिया और नसों में इंजेक्शन लेना शुरू कर दिया।

    इसकी जानकारी जब उनकी पत्नी को मिली तो दोनों में मनमुटाव शुरू हो गया। पत्नी और बच्चा अलग रहने लगे। इस वजह से वह और ज्यादा अवसाद से पीड़ित हो गए। पत्नी व बच्चे के अलग होने पर वह इलाज के लिए एम्स से गाजियाबाद स्थित नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर में इलाज के लिए पहुंचे। तब उन्होंने इलाज करने वाले एम्स के मनोचिकित्सकों को बताया कि उन्हें अधिक सिगरेट पीने की भी आदत है और प्रतिदिन 10-20 सिगरेट पी जाते थे और कभी-कभी अल्कोहल का भी सेवन करते थे। नींद की दवा भी लेते थे।

    मनोचिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. यतन पाल सिंह बलहारा ने बताया कि उन्हें इस इंजेक्शन की ऐसी लत लगी थी कि दर्द नहीं होने पर भी इंजेक्शन लिए बिना नहीं रह पाते थे। इलाज के दौरान उनके भाई हमेशा साथ रहे।

    बहरहाल मनोचिकित्सकों ने दर्द के इलाज के लिए उन्हें आर्थोपेडिक के डॉक्टर को भी दिखाया। आर्थाेपेडिक के डॉक्टर ने उन्हें दर्द की सामान्य दवाएं व फिजियोथेरपी की सलाह दी। डॉ. बलहारा ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों के इलाज में ओपियोइड दवा का इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन, किसी डॉक्टर द्वारा इसका नशे के तौर पर इस्तेमाल करने की बात पहले सामने नहीं आई थी।