नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन का ब्लू प्रिंट तैयार, जल्द होगा एलान
वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन का ब्लू प्रिंट अंतरमंत्रालयी पैनल ने तैयार कर लिया है जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। इसका लक्ष्य 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में मैन्यूफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को 7.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। मिशन में कारोबार को आसान बनाने श्रम बल का निर्माण टेक्नोलाजी की उपलब्धता और एमएसएमई में बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गत जुलाई में पेश बजट में नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन लाने की घोषणा की गई थी। इस काम के लिए सरकार की तरफ से अंतरमंत्रालीय पैनल का गठन किया गया था। पैनल ने मिशन का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है और जल्द ही इसका एलान किया जा सकता है। वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन ( लाख करोड़) डालर की अर्थव्यवस्था में मैन्यूफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को 7.5 ट्रिलियन डालर तक ले जाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ब्लू प्रिंट को तैयार किया गया है।
अगले माह तक मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के ब्लू प्रिंट किया जाएगा सार्वजनिक
अभी देश के जीडीपी में मैन्यूफैक्च¨रग की हिस्सेदारी 14-15 प्रतिशत है जिसे वर्ष 2047 तक 25 प्रतिशत तक किया जाना है। नीति आयोग के सीईओ के नेतृत्व में पैनल का गठन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक इस माह के आखिर में या अगले माह तक मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के ब्लू प्रिंट को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
मुख्य रूप से पांच प्रमुख बातों को ध्यान में रखते हुए यह ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है जिसमें कारोबार को बिल्कुल आसान बनाना, भविष्य के उद्योग को ध्यान में रखते हुए श्रम बल का निर्माण, टेक्नोलॉजी की उपलब्धता, उत्पादों की गुणवत्ता और एमएसएमई में बड़ा बदलाव शामिल है। मिशन को इस प्रकार से तैयार किया जा रहा ताकि मैन्यूफैक्च¨रग को लेकर सभी मंत्रालयों की नीति, इंसेंटिव व कार्रवाई में एकरूपता हो।
मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे वह सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में काफी एडवांस होगा। पूरी तरह से मैन्यूफैक्च¨रग को समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, समर्पित औद्योगिक पार्क, सेक्टर के हिसाब से क्लस्टर, एक-दूसरे से जुडे लाजिस्टिक जोन और निर्बाध रूप से पानी व बिजली की आपूर्ति की सुनिश्चित करना मिशन का लक्ष्य होगा। समावेशी विकास के लिए एमएसएमई में भी मैन्यूफैक्चकरिंग मिशन के तहत बड़ा बदलाव लाया जाएगा।
ताकि भारत के एमएसएमई को वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनाया जा सके और यह तभी संभव है कि एमएसएमई को वित्तीय सुविधा के साथ जरूरत के हिसाब से श्रमिकों की उपलब्धता होगी। मैन्यूफैक्चरिंग मिशन को तैयार करने के दौरान वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी ध्यान में रखा गया है। वैश्विक स्तर का मैन्यूफैक्चकिंग हब बनने के लिए प्रतिस्पर्धी होने के साथ भारत में बनने वाली वस्तुओं की गुणवत्ता भी वैश्विक स्तर की होनी चाहिए।
दुनिया के बाजार में सही वक्त पर गुणवत्ता वाली सही वस्तु की आपूर्ति से ही भारत वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकता है। मैन्यूफैक्च¨रग मिशन के ब्लू प्रिंट को तैयार करने में बड़े-बड़े उद्यमियों से भी सलाह की जा रही है। मिशन के तहत ग्रीन टेक्नोलाजी और ग्रीन उद्यमिता पर भी फोकस किया जा रहा है। ताकि नई टेक्नोलाजी और भविष्य की उद्यमिता में भारत पीछे नहीं रह जाए।
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