नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली केरलम की महिला टीचर बन गई सफाईकर्मी, क्या है वजह?
केरलम की शिक्षिका केआर ऊषा कुमारी ने 20 साल से अधिक समय तक अगस्त्यमलाई के जंगलों में आदिवासी बच्चों को पढ़ाया और कई पुरस्कार जीते।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम। केरलम की केआर ऊषा कुमारी एक ऐसी शिक्षिका हैं, जिनका समर्पण मिसाल बन गया। तिरुवनंतपुरम जिले के अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व के जंगलों में स्थित कुन्नाथमला गांव के अगस्त्य मल्टी ग्रेड लर्निंग सेंटर में उन्होंने 20 साल से ज्यादा समय तक आदिवासी बच्चों को पढ़ाया। वहां कक्षा 1 से 4 तक के बच्चों को शिक्षित करने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
ऊषा कुमारी रोजाना सुबह करीब 7:30 बजे अंबूरी स्थित अपने घर से दोपहिया वाहन से कुंबिक्कल कदवु नदी तट तक जाती थीं। इसके बाद वे लकड़ी की नाव से नदी पार करतीं और फिर घने जंगल व पथरीली पहाड़ियों के बीच 8 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचती थीं। कई बार नाव चलाने वाला न होने पर वे खुद नाव चलाकर नदी पार करती थीं।
पढ़ाने के साथ मिड-डे मील खूद संभालती थीं
साल 1999 से शिक्षण कार्य कर रहीं ऊषा कुमारी 2002 में कुन्नाथमला केंद्र से जुड़ी थीं। उस स्कूल में वे अकेली शिक्षिका थीं। वे गणित, अंग्रेजी, क्षेत्रीय भाषा और पर्यावरण अध्ययन जैसे सभी विषय खुद पढ़ाती थीं।
अध्यापन के साथ-साथ स्कूल का प्रशासनिक काम और बच्चों के लिए मिड-डे मील की व्यवस्था भी वही करती थीं। सीमित बजट के बावजूद उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई या भोजन में कमी नहीं आने दी।
दर्जनों पुरस्कार मिलने के बाद भी अनुबंध पर ही रही नौकरी
आदिवासी बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ऊषा कुमारी को एक दर्जन से अधिक राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनके कठिन सफर पर देश भर के मीडिया का ध्यान भी गया। इसके बावजूद उन्हें आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली।
20 साल पढ़ाने के बाद भी उनकी नौकरी कॉन्ट्रैक्ट पर ही रही। महीनों तक वेतन न मिलने और नौकरी पक्की न होने के विरोध में उन्होंने मार्च 2020 में स्कूल के बाहर भूख हड़ताल भी की थी।
स्कूल बंद हुए तो थमा दी गई झाड़ू
मार्च 2022 में केरलम सरकार ने छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने का हवाला देकर राज्य भर के 271 मल्टी ग्रेड लर्निंग सेंटरों को बंद करने का फैसला किया। इससे 344 एकल-शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया।
पुनर्वास योजना के तहत सरकार ने इन अनुभवी शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में अंशकालिक या पूर्णकालिक सफाईकर्मी के पद पर तैनात कर दिया।
इस तरह दशकों तक हाथ में चॉक थामने वाली ऊषा कुमारी को 1 जून 2022 को तिरुवनंतपुरम के पीएसएनएम गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में सफाईकर्मी का पद संभालना पड़ा।
काम से शर्म नहीं, लेकिन सताती है बच्चों की याद
ऊषा कुमारी ने इस बदलाव को गरिमा के साथ स्वीकार किया। उनका कहना था कि उन्हें नए काम से कोई शर्म नहीं है, क्योंकि सालों तक वेतन की अनिश्चितता झेलने के बाद इस नौकरी से उन्हें एक तय आर्थिक सहारा मिला।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें अपने छात्रों की बहुत याद आती है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि उनकी पेंशन और वरिष्ठता तय करते समय उनके 23 वर्षों के शिक्षण अनुभव को भी गिना जाए।
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