नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार यानि 26 मई को अरूणाचल प्रदेश के एक छोर ढोला से असम के सदिया तक जानेवाले पुल का उद्घाटन किया। सामरिक लिहाज से ख़ास अहमियत रखनेवाले इस पुल की लंबाई 28.5 किलोमीटर है जिसे 2,056 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदी लोहित नदी के ऊपर बने इस पुल को एनडीए सरकार के तीन साल पूरे होने पर देश को सौंपते हुए इसका नाम असम के विश्व प्रसिद्ध गायक व संगीतकार भूपेन हज़ारिका के नाम पर रखने की घोषणा की गई। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस पुल का नाम भूपेन हजारिका के नाम पर क्यों रखी गई।

क्यों भूपेन हजारिका सेतु रखा गया नाम

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के नेता नलिन कोहली ने Jagran.com से खास बातचीत में कहा कि भूपेन हजारिका ऐसे गैर राजनितिक शख्सियत थे जिनका पूरी दुनियाभर में नाम है। उन्होंने संगीत में नदियों का नाम लिया... जैसे ऐ गंगा तू बहती हो क्यों। इतना ही नहीं, उनके नाम से और भी कई चीजें बनी हुई है। ऐसे में इस पुल को एक तरह से भूपेन हजारिका का नाम देकर उनकों श्रद्धांजलि दी गई है।

 

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असम के गौरव से जुड़ा है भूपेन हजारिका का नाम

भूपेन हजारिका वह शख्स थे जिस पर आज यह राज्य असम अपने ऊपर फख्र महसूस कर रहा है। दरअसल, असम का सदिया वही जगह है, जिसकी मिट्टी ने भूपेन हजारिका जैसी शख्सियत को जन्म दिया। जिसके नाम से संगीत की दुनिया दमक उठती है, जिसकी आवाज़ से गायकी की दुनिया गूंज उठती है। जिसकी कविताओं से मुहब्बत के साज़ निकलते हैं, जिसने फिल्में भी बनाई और गीत भी लिखे।

संगीत की दुनिया के महान शख्सियत थे हजारिका

भूपेन हजारिका ने संगीत की दुनिया में वह छाप छोड़ है जो अमिट है। भूपेन हजारिका ना सिर्फ देश के एक महान संगताकार और बेहतरीन गायक थे बल्कि वे अच्छे कवि, उत्कृष्ठ फिल्म निर्माता और शानदार गीतकार रहे हैं। उन्होंने हिंदी फिल्म रुदाली के कई गानों में आवाज़ देने के अलावा अलावा असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे।

पद्म भूषण से सम्मानित हैं भूपेन हजारिका

हजारिका का जन्म 8 सितंबर, 1926 को भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के तिनसुकिया जिले के सदिया में हुआ था। भूपेन हजारिका को सिनेमा जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्हे अवॉर्ड और से भी नवाजा गया था। उन्हें नेशनल अवॉर्ड एज दि बेस्ट रीजनल फिल्म (1975), पद्म भूषण (2011), असोम रत्न (2009) और संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (2009) जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। 5 नवंबर 2011 में मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था।

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