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    कोरोना संक्रमितों समेत सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं सुबीना रमहान

    By Manish PandeyEdited By:
    Updated: Wed, 29 Sep 2021 02:17 PM (IST)

    रहमान दक्षिणी राज्य में इस पेशे को चुनने वाली मुस्लिम समुदाय की पहली महिला मानी जाती है। उनका कहना है कि वह यह काम सिर्फ अपने परिवार का पेट पालने और अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए कर रही हैं।

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    सुबीना अब तक 250 से अधिक कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं।

    त्रिशूर, पीटीआइ। मध्य केरल जिले के इरिंजालकुडा में एक हिंदू श्मशान में मुस्लिम महिला धर्म के बंधन को तोड़कर शवों का अंतिम संस्कार कर रही है। सुबीना रहमान ने अब तक 250 से अधिक कोरोना संक्रमितों सहित सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं।

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    कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोरोना पीड़ितों के शवों का अंतिम संस्कार करते हुए सुबीना को घंटों तक पीपीइ किट पहन कर रहना पड़ता था। वह धर्म या विश्वास की बाधा के बिना अपने तरीके से दिवंगत आत्माओं के लिए प्रार्थना करती हैं।

    रहमान दक्षिणी राज्य में इस पेशे को चुनने वाली मुस्लिम समुदाय की पहली महिला मानी जाती है। उनका कहना है कि वह यह काम सिर्फ अपने परिवार का पेट पालने और अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए कर रही हैं।

    सुबीना कहती हैं कि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि उनको एक श्मशान घाट पर काम करना पड़ेगा। उनका सपना एक पुलिस अधिकारी बनने का था। सुबीना आगे कहती हैं कि शवों को देखना मेरे लिए किसी भी अन्य बच्चे की तरह एक बुरा सपना था, लेकिन अब मुझे लाशों से डर नहीं लगता।

    उनका कहना है कि यही मेरी नियति है। मैं इस काम को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ कर रही हूं। मुझे इस पेशे में आने का कभी कोई पछतावा नहीं हुआ क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि हर काम की अपनी गरिमा होती है ... और मैं जो कर रही हूं उस पर मुझे गर्व है।

    सुबीना रहमान के पति एक दिहाड़ी मजदूर है और उनका एक बेटे है। वह सुबह घर का काम पूरा करने के बाद रहमान सुबह साढ़े नौ बजे श्मशान घाट के लिए निकल जाती हैं। अपने दो पुरुष सहयोगियों के साथ वह पिछले दिन के अंतिम संस्कार के अवशेषों को हटाकर सुबह की ड्यूटी की शुरुआत परिसर की सफाई से करती हैं। कोरोना के दौर में उन्हें लगातार 14 घंटों तक काम करना पड़ता है।