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    Modi Government Foreign Policy: भारत-चीन सीमा विवाद के हल के लिए बातचीत जारी, मोदी सरकार की विदेश नीति में सुरक्षा पहली प्राथमिकता- एस जयशंकर

    By Achyut KumarEdited By:
    Updated: Wed, 13 Jul 2022 07:56 AM (IST)

    मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति में सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तिरुअनंतपुरम में प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान यह बात कही। उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद पर कहा कि इसे हल करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।

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    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (फोटो- एएनआइ)

    तिरुवनंतपुरम, एएनआइ। विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affair Minister S Jaishankar) ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकार ने विदेश नीति में सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, 'मैं इसे मोदी सरकार के एक बड़े दृष्टिकोण के संदर्भ में रखना चाहता हूं। हमने हमेशा सुरक्षा को बहुत उच्च प्राथमिकता दी है, वास्तव में, सुरक्षा हमारी विदेश नीति में नंबर एक प्राथमिकता है। भारत-चीन सीमा पर बोलते हुए जयशंकर ने यह कहते हुए कड़ा रुख अपनाया कि 'पिछले दो वर्षों में, हम यह सुनिश्चित करने में बहुत स्पष्ट और बहुत प्रभावी रहे हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एकतरफा यथास्थिति को बदलने का हमारी तरफ से कोई प्रयास नहीं किया जाएगा।'

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    सीमा मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत जारी

    विदेश मंत्री ने दोहराया कि 1962 में चीन ने कई क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया, जो लद्दाख सहित रणनीतिक है और सीमा बलों के लिए चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देशों के बीच उनके सैन्य कमांडरों और राजनयिकों को शामिल करके चर्चा के माध्यम से सीमा मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत जारी है।

    चीनी विदेश मंत्री से मिले जयशंकर

    एस जयशंकर ने हाल ही में बाली में जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों के एक सम्मेलन के इतर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों पक्ष सीमा मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने के लिए दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की सैन्य वार्ता की प्रतीक्षा करने पर सहमत हुए।

    गलवान संघर्ष में 20 सैनिक हुए थे शहीद

    2020 में गलवान संघर्ष के बाद, गतिरोध को हल करने के लिए कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता हुई है। गलवान घाटी में 15 और 16 जून की रात को हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीनी सेना की कार्रवाई को लेकर गतिरोध के बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर झड़प हुई।