त्वचा कोशिका से बना मानव भ्रूण का मॉडल, बांझपन के कारणों को समझने में करेगा मदद
यह उपलब्धि मानव विकास के प्रारंभिक चरणों को समझाने के साथ ही जन्मजात बीमारियों की पहेली को भी सुलझाएगी। अभी मानव भ्रूण के प्रारंभिक चरणों का अध्ययन बहुत मुश्किल काम है। प्रारंभिक दिनों के भ्रूण आइवीएफ विधियों के दौरान ही उपलब्ध होते हैं।

नई दिल्ली, मुकुल व्यास। विज्ञानियों ने त्वचा की कोशिकाओं से प्रारंभिक मानव भ्रूण का मॉडल तैयार किया है। इससे बांझपन के कारणों को बेहतर ढंग से समझने के साथ ही प्रारंभिक मानव भ्रूण के विकास का अध्ययन किया जा सकेगा। इस शोधकार्य का नेतृत्व ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सटिी के प्रोफेसर जॉस पोलो ने किया। अभी मानव भ्रूण के प्रारंभिक चरणों का अध्ययन बहुत मुश्किल काम है। प्रारंभिक दिनों के भ्रूण आइवीएफ विधियों के दौरान ही उपलब्ध होते हैं। सीमित मात्र के कारण शोध के लिए ऐसे भ्रूण हासिल करना भी बहुत कठिन होता है। ऐसे भ्रूण को ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं। शुक्राणु द्वारा अंडाणु को निषेचित करने के पांच दिन बाद भ्रूण की अवस्था को ब्लास्टोसिस्ट कहा जाता है।
पोलो की टीम ने त्वचा की कोशिकाओं (फाइब्रोब्लास्ट) को ऐसी त्रिआयामी संरचना में बदल दिया जो हर दृष्टि से मानव ब्लास्टोसिस्ट से मिलती है। इस मॉडल को ‘आईब्लास्टोइड’ नाम दिया गया है। यह मॉडल तैयार करने के लिए न्यूक्लियर रीप्रोग्रामिंग नाम की एक विशेष तकनीक अपनाई गई। इसके जरिये शोधकर्ता मानव त्वचा कोशिकाओं की पहचान बदलने में सफल रहे। जब कोशिकाओं को जेली जैसे पदार्थ के त्रिआयामी सांचे में रखा गया तो वे ब्लास्टोइड जैसी संरचना के रूप में संगठित होने लगीं। यह उपलब्धि गेमचेंजर साबित हो सकती है। आईब्लास्टोइड मॉडल से विज्ञानियों को मानव विकास के प्रारंभिक चरणों को समझने और जन्मजात बीमारियों के कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा प्रारंभिक भ्रूणों पर दवाओं, विषाक्त पदार्थो या टॉक्सिन तथा वायरसों के प्रभाव की पड़ताल भी की जा सकेगी।
यह पूरी की पूरी प्रक्रिया वास्तविक मानव ब्लास्टोसिस्ट्स के बिना पूर्ण हो सकती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्य बेहद तेज रफ्तार से किया जा सकता है। मानव भ्रूण के बारे में समझ बढ़ने से नई चिकित्सा और उपचार विधियों के विकास की राह भी खुलेगी। शोध टीम के एक अन्य सदस्य जून वू का कहना है कि असीमित मात्र में भ्रूण मॉडल उपलब्ध होने से भ्रूण के विकास पर शोध आसान होगा। विज्ञानियों ने स्पष्ट किया कि उनका मॉडल मानव ब्लास्टोसिस्ट से भिन्न है।
हालांकि उनके शोध पर नैतिक सवाल उठना स्वाभाविक है। शोध दल का दावा है कि उन्होंने आईब्लास्टोइड्स का विकास ऑस्ट्रेलिया के कानूनों के दायरे में किया है और मोनाश यूनिवर्सटिी के नैतिकता पैनल ने भी उसे मंजूरी दे दी है। मानव भ्रूण पर शोध को नैतिकता के दायरे में रखने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। अभी तक जानवरों में ही ब्लास्टोसिस्ट के मॉडल उत्पन्न किए गए थे। वर्ष 2017 और 2018 में ब्रिटेन और नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने स्टेम कोशिकाओं के प्रयोग से चूहों में सफलतापूर्वक ब्लास्टोइड्स के मॉडल विकसित किए थे। (लेखक विज्ञान के जानकार हैं)
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।