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    पिता की दूसरी शादी से नाखुश हें बच्चे, अब सौतेली मां के साथ नहीं संयुक्त परिवार में रहेंगे; हाईकोर्ट का फैसला

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 06:34 AM (IST)

     संयुक्त परिवार में दादा-दादी, चाचा-चाची के साथ रह रहे भाई-बहन ने दूसरी शादी कर कहीं दूसरे स्थान पर जा बसे पिता के साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट ने भीकहदियाकि अब पिता बच्चों को अपने साथ रखने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। वे संयुक्त परिवार में ही रहेंगे। 

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    नाबालिग बच्चे पिता और सौतेली मां के साथ नहीं, संयुक्त परिवार में रहेंगे : हाई कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)

    शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। संयुक्त परिवार में दादा-दादी, चाचा-चाची के साथ रह रहे भाई-बहन ने दूसरी शादी कर कहीं दूसरे स्थान पर जा बसे पिता के साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट ने भी कह दिया कि अब पिता बच्चों को अपने साथ रखने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। वे संयुक्त परिवार में ही रहेंगे।

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    कोर्ट ने यह भी माना कि पिता की दूसरी शादी से बच्चे नाखुश हैं। पहली पत्नी से तलाक के बाद एक फिजियोथेरेपिस्ट ने गत वर्ष दूसरा विवाह किया था। लेकिन जब बच्चों को रखने की बात आई तो कोर्ट ने संयुक्त परिवार की परंपरा को महत्व देते हुए पिता के अधिकार को खारिज कर दिया।

    सूरत के रहने एक फिजियोथेरेपिस्ट ने 2023 में अपनी पत्नी से तलाक के बाद 2024 में दूसरी शादी कर ली। चौदह वर्षीय बेटे और नौ वर्षीय बेटी जन्म से ही संयुक्त परिवार में दादा-दादी और चाचा-चाची के साथ रह रहे थे। माता-पिता के अलग होने के बाद भी वे इसी संयुक्त परिवार में रह रहे थे।

    अपनी दूसरी शादी के बाद फिजियोथेरेपिस्ट अपनी दूसरी पत्नी के साथ एक नए घर में शिफ्ट हो गया। उसने बच्चों को अपने साथ रखने के लिए परिवार में बात की तो बच्चों ने स्वयं इससे इन्कार कर दिया।

    इसी विवाद के चलते उसने एक हेबियस कार्पस याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसका परिवार बच्चों को अवैध रूप से हिरासत में रख रहा है और उसे उनसे मिलने से रोक रहा है। परिवार ने उसकी बेटी का स्कूल बदल दिया तो आपसी तनाव और बढ़ गया।

    याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जैविक पिता के रूप में वह अपने बच्चों का प्राकृतिक रूप से अभिभावक होने का अधिकार रखता है। जब कोर्ट ने बच्चों को बुलाया तो दोनों ने बताया कि वे अपने पिता और सौतेली मां के साथ नहीं रहना चाहते। इस विवाद का मध्यस्थता से हल करने का अदालत का प्रयास विफल रहा।

     

    न्यायाधीश एन एस संजय गौड़ा और न्यायाधीश यूटी देसाई की खंडपीठ ने फिजियोथेरेपिस्ट पिता की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने भी कह दिया कि पिता बच्चों को अपने साथ रखने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।