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    Youngest Reiki Healer of India: मिलिए भारत के सबसे युवा रेकी हीलर आयुष गुप्ता से

    By Sanjay PokhriyalEdited By:
    Updated: Sat, 22 Aug 2020 03:03 PM (IST)

    17 वर्षीय आयुष को अमिताभ बच्चन के हाथों युवा रेकी हीलर का सम्मान भी मिला है। इन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर रेकी के ऊपर एक किताब भी लिखी है जो जल्द ही लॉन्च होगी।

    Youngest Reiki Healer of India: मिलिए भारत के सबसे युवा रेकी हीलर आयुष गुप्ता से

    नई दिल्ली, अंशु सिंह। मूल रूप से मध्यप्रदेश के और अब मुंबई में रह रहे आयुष गुप्ता देश के सबसे कम उम्र के रेकी हीलर हैं। इनके नाम सबसे युवा टैरोट कार्ड रीडर का खिताब भी है। बीते महीनों में ये कोविड 19 के कई मरीजों को भी बिल्कुल स्वस्थ करने में सफल रहे हैं। इसके लिए वे कोई शुल्क नहीं लेते। इनका दावा है कि अब तक 400 से अधिक कैंसर सहित अन्य मरीजों को स्वस्थ कर चुके हैं। रेमो डिसूजा, शंकर महादेवन, रवि दूबे,बलराज सयाल, भारती सिंह जैसे अनेक सेलिब्रेटी इनके पास परामर्श के लिए आते रहते हैं। 17 वर्षीय आयुष को अमिताभ बच्चन के हाथों युवा रेकी हीलर का सम्मान भी मिला है। इन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर रेकी के ऊपर एक किताब भी लिखी है, जो जल्द ही लॉन्च होगी।

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    इतनी छोटी उम्र में रेकी के प्रति रुझान कैसे हुआ, इस पर आयुष बताते हैं, मैं सात-आठ साल की उम्र से पापा को ध्यान, साधना करते देखा करता था। वे काफी आध्यात्मिक थे और उन्होंने ही मुझे मेडिटेशन करना सिखाया। अच्छा लगा। हालांकि कुछ योजना नहीं बनाई थी कि रेकी या टैरोट कार्ड रीडिंग में कुछ करूंगा। लेकिन 12 साल की उम्र में पापा ने मुझे रेकी के बारे में बताया। इसके बाद आयुष ने बकायदा रेकी सीखी। वे बताते हैं, मेरी मां को गले में कुछ तकलीफ हुई थी। उनका इलाज चल रहा था। लेकिन डॉक्टर विश्वास से नहीं कह पा रहे थे कि वह ठीक हो पाएंगी या नहीं। तत्पश्चात् तीन से चार महीने मैंने उनकी हीलिंग की। उन्हें दोबारा चेक अप के लिए ले जाया गया, तो जांच के बाद उनके गले की समस्या बिल्कुल ठीक हो चुकी थी। इससे आयुष का विश्वास बढ़ा। वहीं से एक नई यात्रा शुरू हुई। उन्होंने अन्य लोगों की भी मदद करने का फैसला लिया।

    वे कहते हैं कि एक बार जब ऊर्जा से कनेक्शन हो जाता है, तो और नई चीजें सीखने का मन होता है। इसी कड़ी में टैरोट कार्ड रीडिंग भी सीखी। वे पहले खुद पर ही चीजों को आजमाते हैं। जब विश्वास हो जाता है, तो उससे अन्य लोगों का उपचार या मदद करते हैं। अब तक एक हजार से अधिक रीडिंग्स कर चुके हैं, जिनका काफी पॉजिटिव नतीजे भी मिले। मध्यप्रदेश में 200 से अधिक हीलिंग सेशंस करने के बाद जब चार साल पहले आयुष मुंबई पहुंचे, तो दोस्तों की मदद से इनका संपर्क टीवी एवं बॉलीवुड हस्तियों से हुआ। इन्हें केबीसी के सेट पर भी बुलाया गया, जहां उन्होंने दो दिन का रेकी सेशन लिया। अमिताभ बच्चन भी उनसे काफी प्रभावित हुए। हाल में जब कोरोना ने दस्तक दी, तो उन्होंने कुछ पीड़ितों को निशुल्क परामर्श दिया।

    वे बताते हैं, मई महीने में कॉलेज के एक सीनियर का फोन आया था कि उनकी बहन (जो गर्भवती भी थीं) कोविड पॉजिटिव आई हैं। वे चाहते थे कि मैं एक बार उन्हें देखूं। शुरू में थोड़ा नर्वस जरूर हुआ। लेकिन फिर को पॉजिटिव किया और करीब 10 सेशंस लिए। उसका अच्छा असर हुआ। उनके कई लक्षण समाप्त हो गए। उन्हें होम क्वारांटिन के लिए अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मैंने अगले 14 दिन फिर से उनकी हीलिंग की। चेकअप के बाद सब हैरान रह गए क्योंकि रिजल्ट निगेटिव आया था। आयुष के अनुसार, वे कोई दावा नहीं कर रहे हैं कि रेकी से कोविड के मरीज ठीक हो जाते हैं। लेकिन इससे फायदा तो जरूर होता है। आसपास की नकारात्मकता ऊर्जा से बेअसर रहने के लिए आयुष हर रोज स्वयं की हीलिंग भी करते हैं। मेडिटेशन करते हैं। रेकी ने उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है। पूरे व्यक्तित्व को ही बदल दिया है। वे बताते हैं, ‘शुरुआत में हीलिंग सेशन के दौरान आयुष को अपनी कम उम्र के कारण कुछ चुनौतियां जरूर आईं। लेकिन मैं उम्र को सिर्फ एक संख्या मानता हूं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता हूं।‘ यहां तक कि अपनी पढ़ाई से भी कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। 12वीं के बाद इन्होंने अभी साइकोलॉजी (स्नातक) में दाखिला लिया है। लेकिन आगे फुलटाइम रेकी के साथ ही जुड़े रहना चाहते हैं।