जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भाजपा सांसदों के विरोध के बाद रेलवे ने ट्रेनों में मालिश सेवा शुरू करने का इरादा छोड़ दिया है। पश्चिम रेलवे ने बाकायदा बयान जारी कर उक्त प्रस्ताव को रद किए जाने की जानकारी दी है।पश्चिम रेलवे ने कुछ रोज पहले यात्रियों को ट्रेन के भीतर मालिश या मसाज सेवा प्रदान करने की योजना का एलान किया था। साथ ही मसाज सेवा की दरें और ट्रेनो की सूची भी जारी की थी। इस सेवा की शुरुआत इंदौर से होनी थी, लेकिन आम जनता के अलावा इंदौर के विशिष्ट लोगों ने ही इस सेवा के औचित्य पर सवाल खड़े कर दिए।

मसाज सेवा पर पहला विरोध इंदौर के मौजूदा भाजपा सांसद शंकर लालवानी ने जताया था और रेलमंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने 'भारतीय संस्कृति के मानकों' का हवाला देते हुए मसाज सेवा को 'स्तरहीन' बताया था और जन भावनाओं के अनुसार इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

लालवानी के बाद सुमित्रा महाजन ने भी गोयल को चिट्ठी लिखी और प्रस्ताव के बाबत अपनी आशंकाओं और जिज्ञासाओं से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने जानना चाहा था कि क्या रतलाम डिवीजन की प्रस्तावित योजना को मंत्रालय ने मंजूरी दी है? इस प्रकार की मालिश सुविधा के लिए चलती रेलगाड़ी में किस तरह की व्यवस्था की जाएगी? क्योंकि इससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा एवं सहजता के संबंध में कुछ प्रश्न हो सकते हैं। उन्होंने पूछा था कि क्या इंदौर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर मसाज पार्लर खोले जाने का भी कोई प्रस्ताव है?

प्रस्ताव के तहत पश्चिम रेलवे की 39 ट्रेनों में मसाज सेवा शुरू करने की योजना थी। इसमें पहचानपत्र युक्त प्रशिक्षित वर्दीधारी सेवकों द्वारा यात्रियों के सिर और पैरों की मालिश का प्रावधान था। बीस मिनट की प्रत्येक मसाज सेवा के लिए यात्री से 300 रुपये का शुल्क वसूला जाना था। योजना तैयार करने वाले अधिकारियों का दावा था कि इससे सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलने के अलावा रेलवे को सालाना 1.1 करोड़ रुपये रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी।

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Posted By: Bhupendra Singh