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    फर्जी फसल बीमा दावा करने वालों पर होगा एक्शन, इन किसानों को ब्लैकलिस्ट करेगी महाराष्ट्र सरकार

    Updated: Sun, 06 Jul 2025 11:47 PM (IST)

    महाराष्ट्र सरकार फसल बीमा में धोखाधड़ी करने वाले किसानों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी में है। कृषि विभाग के अनुसार फर्जी दावा करने वाले किसानों पर कार्रवाई की जाएगी जिससे वे कुछ सालों तक बीमा का दावा नहीं कर पाएंगे। सरकार ने कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी) के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की है जिन्होंने फर्जी आवेदन दाखिल किए थे।

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    फर्जी फसल बीमा दावा करने वालों पर होगा एक्शन। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, राज्य सरकार उन किसानों को ब्लैकलिस्ट में डालने की तैयारी कर रही है, जिन्होंने फर्जी फसल बीमा दावे प्रस्तुत किया है और बीमा का लाभ किया है।

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    बताया जा रहा है कि राज्य कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि पहले यह कार्रवाई मुख्य रूप से बिचौलियों और सेवा प्रदाताओं तक ही सीमित थी। बता दें कि अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय फसल बीमा कार्यक्रम के तहत धोखाधड़ी वाले आवेदनों के कई मामलों के मद्देनजर लिया गया है।

    इन किसानों को किया जाएगा ब्लैकलिस्ट

    एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने अब किसानों को काली सूची में डालने का भी निर्णय लिया है, यदि वे फसल बीमा का अनुचित लाभ पाने के लिए फर्जी दावे प्रस्तुत करते पाए गए। यह एक निवारक उपाय है, ताकि किसान इस तरह की गड़बड़ियों में लिप्त न हों

    वहीं, सरकारी नीति की मानें तो किसान अधिक या कम वर्षा, कीट संक्रमण या प्राकृतिक घटनाओं के कारण बुवाई में चुनौतियों जैसे कारणों से होने वाले नुकसान के लिए बीमा दावा दायर कर सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि एक बार ब्लैकलिस्ट में शामिल होने के बाद कोई भी किसान कम से कम कुछ सालों कर फसल बीमा का दावा नहीं कर सकेंगे।

    CSC के खिलाफ भी राज्य सरकार ने लिया एक्शन

    बताया जा रहा है कि केवल किसानों के खिलाफ नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में राज्य भर के कई कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

    जानकारी के अनुसार, इन सीएससी ने 2024 खरीफ सीजन के लिए कथित तौर पर करीब 4,400 फर्जी फसल बीमा आवेदन दाखिल किया था। एक अधिकारी ने बताया कि बीड, नांदेड़, परभणी, पुणे, लातूर और जालना जैसे जिलों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले, बिचौलियों और सीएससी संचालकों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। अब, झूठे दावे प्रस्तुत करने वाले किसानों को भी काली सूची में डालने सहित परिणाम भुगतने होंगे।

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