विशेष जन सुरक्षा विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा से पास, फडणवीस बोले- उग्रवादी संगठनों पर नियंत्रण है उद्देश्य; जानिए बिल में क्या है
महाराष्ट्र विधानसभा ने महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक 2024 पारित किया जिसका उद्देश्य राज्य में माओवादी संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि विधेयक का लक्ष्य वामपंथी उग्रवादियों पर नियंत्रण रखना है न कि संवैधानिक दायरे में असंतोष को दबाना। विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों के बाद इसे मंजूरी दी गई।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा ने गुरुवार को महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक 2024 को मंजूरी दे दी, जिसमें राज्य में माओवादी संगठनों की गतिविधियों को रोकने का वादा किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधेयक पेश करते हुए सदन को बताया कि इसका उद्देश्य केवल वामपंथी उग्रवादी संगठनों पर नियंत्रण करना है तथा इसका उद्देश्य सरकार या उन जन आंदोलनों के विरुद्ध असंतोष को रोकना नहीं है, जो भारत के संविधान में विश्वास रखते हैं तथा संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं।
फडणवीस ने कहा कि यह विधेयक किसी को परेशान करने के लिए नहीं है। बल्कि यह उन लोगों के खिलाफ है जो लोगों को भारतीय संविधान के खिलाफ भड़काते हैं। इसके तहत किसी भी पत्रकार या राजनीतिक कार्यकर्ता या नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। यह विधेयक देश और राज्य की सुरक्षा के लिए है और उन लोगों के खिलाफ है जो भारतीय संविधान के खिलाफ युद्ध की घोषणा करना चाहते हैं।
विधेयक को लेकर काफी हंगामा हुआ था
यह विधेयक मूल रूप से दिसंबर 2024 के शीतकालीन सत्र में सदन में पेश किया जाना था। तब इस विधेयक को लेकर काफी हंगामा हुआ था। क्योंकि माना जा रहा था कि इसका इस्तेमाल जनांदोलनों को दबाने के लिए और नागरिक समाज की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए किया जाएगा। इसलिए सरकार ने विधेयक के मसौदे में संशोधन सुझाने के लिए इसे राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली एक संयुक्त प्रवर समिति को सौंपने का फैसला किया था।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने स्वयं विधेयक के बारे में भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक विचार-विमर्श भी किया। इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने सदन को बताया कि विधेयक के बारे में 14,000 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए थे। उनकी समीक्षा के बाद विधेयक के मसौदे में तीन बदलाव किए गए हैं। ये बदलाव मुख्य रूप से प्रस्तावना, परिभाषा और सलाहकार बोर्ड के गठन में हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवर समिति के सभी सदस्य बदलावों से संतुष्ट हैं और उन्होंने कोई असहमति पत्र नहीं दिया है।
सलाहकार बोर्ड की स्थापना का प्रस्ताव
- संशोधनों के अनुसार, पहले इस विधेयक का शीर्षक ‘व्यक्तियों और संगठनों की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए विधेयक’ था, लेकिन अब इसे संशोधित करके ‘उग्रवादी, वामपंथी उग्रवादी संगठनों या इसी तरह के संगठनों की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए विधेयक’ कर दिया गया है। इसके अलावा, विधेयक में एक सलाहकार बोर्ड की स्थापना का प्रस्ताव है, जो किसी विशेष संगठन को गैरकानूनी घोषित करेगा।
- इस बोर्ड में एक कार्यरत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक सेवानिवृत्त ज़िला न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के एक सरकारी वकील शामिल होंगे। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस समिति के अध्यक्ष होंगे। पहले, सलाहकार बोर्ड में केवल एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश या समान योग्यता वाले व्यक्ति का ही नाम सुझाया गया था।
जांच अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक से कम नहीं
इसके अलावा, विधेयक में यह प्रस्ताव है कि अपराधों का जांच अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक से कम नहीं होगा। समिति के सदस्यों ने बैठकों के दौरान बताया था कि यूएपीए और अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच पुलिस उपाधीक्षक से कम नहीं, बल्कि उच्च पद के अधिकारी द्वारा की जाती है। पहले, यह जांच पुलिस उप-निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती थी।
विधेयक में कहा गया है कि गैरकानूनी गतिविधि का अर्थ किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा की की गई कोई भी कार्रवाई है, चाहे वह किसी कृत्य के माध्यम से हो या मौखिक या लिखित शब्दों द्वारा, या संकेत द्वारा, या दृश्य चित्रण द्वारा या अन्यथा। गैरकानूनी गतिविधि सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और सौहार्द के लिए खतरा या संकट पैदा करती है, जो सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव में हस्तक्षेप करती है या हस्तक्षेप करने की प्रवृत्ति रखती है, या जो कानून के प्रशासन या उसकी स्थापित संस्थाओं और कर्मियों के साथ हस्तक्षेप करती है या हस्तक्षेप करने की प्रवृत्ति रखती है।
सदन में बोल नहीं पाए ये नेता
चूंकि प्रवर समिति के सदस्यों को सदन में विधेयक पर बोलने की अनुमति नहीं होती, इसलिए प्रवर समिति के सदस्य रहे शिवसेना (यूबीटी) के भास्कर जाधव, कांग्रेस के नाना पटोले और विजय वडेट्टीवार एवं राकांपा (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल सदन में बोल नहीं सके। उनकी जगह पूर्व मंत्री डॉ. नितिन राउत, विश्वजीत कदम, रोहित पवार और सीपीएम के विनोद निकोल ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कुछ सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सदस्यों द्वारा उठाई गई शंकाओं का समाधान करते हुए विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपनी अपील दोहराई। तदनुसार, सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी गई। केवल निकोल ने विधेयक के विरोध में अपना मत दर्ज किया।
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