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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वक्‍त से साथ बदल रहा मदरसा, अब होगी संस्‍कृत की पढ़ाई

By Prateek KumarEdited By:
Published: Fri, 12 Oct 2018 11:07 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 12 Oct 2018 11:30 PM (GMT+05:30)

राजस्थान के उदयपुर शहर के एक मदरसे में बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाएगी। बच्चों को संस्कृत पढ़ाने के लिए इस ...और पढ़ें

वक्‍त से साथ बदल रहा मदरसा, अब होगी संस्‍कृत की पढ़ाई
वक्‍त से साथ बदल रहा मदरसा, अब होगी संस्‍कृत की पढ़ाई

जयपुर [जागरण संवाददाता]। झीलों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान के उदयपुर शहर के एक मदरसे में बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाएगी। बच्चों को संस्कृत पढ़ाने के लिए इस मदरसे में संस्कृत के शिक्षक को नियुक्त किया गया है ।

उदयपुर के महावातवाड़ी इलाके में संचालित मदरसे में 5वीं कक्षा पास करने के बाद बच्चों को उर्दू को अपनी तीसरी भाषा के रूप में चुनना पड़ता है, लेकिन यहां पढ़ने वाले छह गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों ने संस्कृत को अपनी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ने की इच्छा जाहिर की । इसके बाद मदरसा कमेटी ने यहां संस्कृत के शिक्षक की नियुक्ति की है। 

अभी यहां पढ़ रहे सौ से ज्‍यादा बच्‍चे
वर्तमान में इस मदरसे में 122 बच्चें पढ़ाई कर रहे हैं। मदरसा कमिटी के अध्यक्ष मेराज अहमद ने बताया कि इस मदरसे की बेहतर शिक्षा व्यवस्था और आधारभूत संरचना को देखकर संस्थान में इस साल छह गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों का नामांकन हुआ था। 

वक्‍त के बाद बदलाव
मदरसे में इन बच्चों का नामांकन राजस्थान मदरसा बोर्ड की अनुमति के बाद लिया गया था। इस संबंध में राजस्थान मदरसा बोर्ड के सचिव मोहम्मद सलीम खान ने बताया कि प्रदेश में मदरसे बदलते वक्त के साथ आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं । 

हिंदी और अरबी में करते हैं प्रार्थना 
मदरसों में शिक्षा की सारी आधुनिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे सारे धर्मों के बच्चे यहां पढ़ाई कर सकें। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, यदि कोई मदरसा कमेटी संस्कृत की पढ़ाई कराना चाहे तो मदरसा बोर्ड इसकी अनुमति देगा। मदरसों में सुबह बच्चे हिंदी और अरबी में प्राथनाएं करते हैं और फिर राष्ट्र-गान भी गाते हैं।