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    Parliament: लोकसभा में अब शपथ के दौरान सदस्य नहीं लगा सकेंगे नारे, स्पीकर ओम बिरला ने नियम में किया संशोधन

    By Agency Edited By: Jeet Kumar
    Updated: Thu, 04 Jul 2024 06:00 AM (IST)

    पिछले सप्ताह शपथ के दौरान कई सदस्यों ने अलग-अलग नारे लगाए थे। एक सदस्य ने जय फलस्तीन का नारा भी लगाया था जिस पर भी कई सदस्यों ने आपत्ति भी जताई थी। शपथ के दौरान नारेबाजी करने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम में संशोधन किया है जिसके मुताबिक निर्वाचित सांसद सदन के सदस्य के रूप में शपथ लेते समय कोई भी अतिरिक्त टिप्पणी नहीं कर सकते।

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    लोकसभा में सदस्य अब शपथ के दौरान नहीं लगा सकेंगे नारे

     पीटीआई, नई दिल्ली। लोकसभा के कुछ सदस्यों द्वारा शपथ के दौरान नारेबाजी करने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम में संशोधन किया है, जिसके मुताबिक निर्वाचित सांसद सदन के सदस्य के रूप में शपथ लेते समय कोई भी अतिरिक्त टिप्पणी नहीं कर सकते।

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    ओम बिरला ने सदन के कामकाज से संबंधित कुछ मामलों को विनियमित करने के लिए अध्यक्ष के निर्देशों में 'निर्देश-1' में एक नया खंड जोड़ा है, जो नियमों का हिस्सा नहीं था। निर्देश-1 में संशोधन के अनुसार, नया खंड-तीन अब यह कहता है कि एक सदस्य जब शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा तो वह उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में किसी भी शब्द का उपयोग या अभिव्यक्ति नहीं करेगा। यानी कोई टिप्पणी नहीं करेगा।

    इस कारण लिया गया फैसला

    यह संशोधन पिछले सप्ताह शपथ लेते समय कई सदस्यों द्वारा 'जय संविधान' और 'जय हिंदू राष्ट्र' जैसे नारे लगाने की पृष्ठभूमि में आया है। एक सदस्य ने 'जय फलस्तीन' का नारा भी लगाया था, जिस पर भी कई सदस्यों ने आपत्ति भी जताई थी।

    लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से शपथ लेते समय निर्धारित प्रारूप पर कायम रहने का अनुरोध किया था, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आरोप लगाया था कि कई सदस्यों ने शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने के महत्वपूर्ण अवसर का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश भेजने के लिए किया।

    ओम बिरला ने कहा, लोकसभा में 103 प्रतिशत कामकाज हुआ

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में 103 प्रतिशत कामकाज हुआ। बिरला ने बताया कि सत्र के दौरान कुल सात बैठकें हुईं और सदन करीब 34 घंटे तक चला। सत्र के दौरान 539 नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली। इसके अलावा पहले सत्र में ओम बिरला का दोबारा स्पीकर के रूप में चुनाव हुआ और राष्ट्रपति का अभिभाषण भी हुआ। मंगलवार को लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।

    ओम बिरला ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में 68 सदस्यों ने भाग लिया। 26 जून को हुए लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव का जिक्र करते हुए बिरला ने ध्वनिमत से दूसरी बार उन्हें अध्यक्ष चुने जाने पर आभार व्यक्त किया। स्पीकर ने बताया कि 26 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रिपरिषद का सदन में परिचय कराया।

    राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा

    लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि 27 जून को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा 18 घंटे से अधिक समय तक चली और 68 सदस्यों ने इसमें भाग लिया। दो जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब के साथ चर्चा समाप्त हुई। बिरला ने आगे बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी की नियुक्ति की घोषणा 27 जून को सदन में की गई थी।

    पीएम मोदी को दिया धन्यवाद

    ओम बिरला ने नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण और अध्यक्ष के चुनाव के दौरान कार्यवाही के सुचारु संचालन के लिए प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सदन को सुचारु रूप से चलाने में योगदान देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू, विभिन्न पार्टियों के नेताओं और सदन के सदस्यों को भी धन्यवाद दिया।

    संसद में व्यवधान पैदा करने के लिए रिजिजू ने की कांग्रेस की आलोचना

    संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषणों को जानबूझकर बाधित करने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए की आलोचना की। पत्रकार वार्ता में रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सभी मुद्दों को उठाने के लिए पर्याप्त समय आवंटित किया गया था और फिर भी उन्होंने संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री के जवाब को बाधित करने का विकल्प चुना।

    रिजिजू ने कहा कि भाषण के दौरान कुछ व्यवधान ठीक है, लेकिन नारे लगाकर प्रधानमंत्री के पूरे दो घंटे के भाषण को बाधित करना निश्चित रूप से उचित नहीं है। ऐसा कभी नहीं हुआ। मंत्री ने कहा कि सरकार संसद की कार्यवाही को बाधित करने की कांग्रेस की रणनीति को कभी सफल नहीं होने देगी।