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    भारत-वियतनाम अपने रिश्तों को लगातार बना रहे प्रगाढ़, सैन्य बलों के आपसी सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच हुआ लाजिस्टिक समझौता

    राजनाथ और फान की बातचीत के दौरान हुए समझौते के बाद रक्षा मंत्रालय ने भारत-वियतनाम रिश्तों को मौजूदा समय के सबसे भरोसेमंद रिश्तों में एक बताते हुए कहा कि दोनों देश एक दूसरे के हितों और चिंताओं को समझते हैं।

    By Dhyanendra Singh ChauhanEdited By: Updated: Wed, 08 Jun 2022 08:37 PM (IST)
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    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत ने चीन की तिरछी नजर की अनदेखी करते हुए वियतनाम के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को दीर्घकालिक मजबूती देने के लिए भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी 2030 के संयुक्त विजन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वियतनाम के उनके समकक्ष जनरल फान वान गियांग ने हनोई में बुधवार को द्विपक्षीय बातचीत के बाद इस संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस विजन दस्तावेज के तहत भारत और वियतनाम अपने रक्षा संबंधों के दायरे और आकार दोनों को बढ़ाएंगे। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच हुए लाजिस्टिक समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं लाजिस्टिक जरूरतों के लिए एक दूसरे के सैन्य बेस का उपयोग कर सकेंगी।

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    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के साथ सैन्य सहयोग के इस समझौते को लाभदायक करार देते हुए कहा है कि यह दोनों देशों के रक्षा सहयोग की संभावनाएं ही नहीं, आकार को भी बड़ा करेगा। मैत्री पूर्ण रिश्तों में सैन्य सहयोग के इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की लगातार बढ़ती दादागिरी को नियंत्रित करने के लिए वियतनाम में भारत की ठोस रणनीतिक मौजूदगी मायने रखती है। इसके मद्देनजर ही राजनाथ सिंह और जनरल फान की मौजूदगी में लाजिस्टिक सहयोग बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को आगे ले जाने के समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। भारत-वियतनाम की सेनाओं के बीच बढ़ती भागीदारी के इस दौर में पारस्परिक रूप से लाभकारी लाजिस्टिक सहयोग का यह समझौता प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    दोनों देश एक दूसरे के हितों और चिंताओं को हैं समझते

    इसकी अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि यह पहला ऐसा बड़ा समझौता है, जिस पर वियतनाम ने किसी भी देश के साथ हस्ताक्षर किए हैं। राजनाथ और फान की बातचीत के दौरान हुए समझौते के बाद रक्षा मंत्रालय ने भारत-वियतनाम रिश्तों को मौजूदा समय के सबसे भरोसेमंद रिश्तों में एक बताते हुए कहा कि दोनों देश एक दूसरे के हितों और चिंताओं को समझते हैं।

    भारत की एक्ट ईस्ट कूटनीति और इंडो-पैसिफिक विजन में वियतनाम एक महत्वपूर्ण देश

    बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने वियतनाम को भारत की ओर से दी गई 500 मिलियन अमेरिकी डालर की रक्षा ऋण सहायता को शीघ्र ही अंतिम रूप देने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन से वियतनाम की रक्षा क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी। रक्षा मंत्री ने वियतनाम के सशस्त्र बलों की क्षमता निर्माण के लिए वायु सेना अधिकारी प्रशिक्षण स्कूल में भाषा और सूचना प्रोद्योगिकी लैब की स्थापना के लिए दो सिमुलेटर तथा वित्तीय अनुदान देने की भी घोषणा की। दोनों देश 2016 से एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं और रक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है। भारत की एक्ट ईस्ट कूटनीति और इंडो-पैसिफिक विजन में वियतनाम एक महत्वपूर्ण देश है। रक्षा संबंधों को मजबूती देने के साथ ही रणनीतिक लिहाज से राजनाथ सिंह की यात्रा की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका दौरा केवल जनरल फान से द्विपक्षीय बातचीत तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने वियतनाम के राष्ट्रपति नगुएन जुआन फूक और प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह से भी मुलाकात की। वियतनाम के शिखर नेतृत्व के साथ रक्षा मंत्री की इन मुलाकातों में भी जाहिर तौर पर चीन के लिए संदेश छिपा है।